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बॉर्डर के 10 KM में मचेगा हड़कंप! अमित शाह ने दिया घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर निकालने का ‘अल्टीमेटम’

अररिया पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि सीमांचल से जल्द ही घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर निकालने का अभियान शुरू होगा और बॉर्डर के 10 किमी के दायरे में अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त किया जाएगा.

Amit Shah Araria Visit

बिहार के सीमांचल इलाके में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है. गुरुवार को अररिया पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ के मुद्दे पर अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है. भारत-नेपाल सीमा पर स्थित लेट्टी बॉर्डर पर एसएसबी (SSB) कैंप का उद्घाटन करने पहुंचे शाह ने साफ शब्दों में कह दिया कि अब घुसपैठियों के दिन लद गए हैं. उन्होंने घोषणा की कि सरकार देश की मिट्टी से एक-एक घुसपैठिये को चुन-चुनकर बाहर निकालने की तैयारी कर चुकी है.

“सिर्फ चुनावी वादा नहीं, मोदी सरकार का संकल्प”

अमित शाह ने अपने संबोधन में जनता को याद दिलाया कि चुनाव के वक्त उन्होंने सीमांचल को घुसपैठियों से मुक्त करने का जो वादा किया था, वह कोई खोखला चुनावी नारा नहीं था. उन्होंने कहा, “अक्सर जनता को नेताओं के वादे याद दिलाने पड़ते हैं, लेकिन आज मैं खुद अपना वादा याद दिलाने आया हूँ. हमारा मकसद सिर्फ वोटर लिस्ट से नाम हटाना नहीं, बल्कि घुसपैठियों को भारत की भूमि से पूरी तरह बाहर करना है.”

शाह ने बताया कि सीमांचल क्षेत्र में इस बड़े अभियान की शुरुआत बहुत जल्द होने वाली है. उन्होंने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि घुसपैठिये न केवल चुनाव को प्रभावित करते हैं, बल्कि वे गरीबों के हक का राशन छीनते हैं और युवाओं के रोजगार के अवसरों को खत्म कर देते हैं.

सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में चलेगा ‘बुलडोजर’

गृह मंत्री ने सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि बॉर्डर के 10 किलोमीटर के दायरे में जितने भी अवैध अतिक्रमण हैं, उन्हें इस अभियान के तहत पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा. इसके साथ ही घुसपैठियों की पहचान का काम भी युद्ध स्तर पर शुरू होगा.

डेमोग्राफी में बदलाव को बताया ‘खतरनाक’

देश की बदलती जनसांख्यिकी (Demography) पर चिंता जताते हुए अमित शाह ने कहा कि अवैध घुसपैठ से होने वाला बदलाव किसी भी देश की संस्कृति, इतिहास और भूगोल के लिए बेहद खतरनाक होता है. उन्होंने बताया कि सरकार ने इसके लिए एक ‘हाई पावर डेमोग्राफी मिशन’ (उच्च स्तरीय समिति) बनाने का फैसला किया है. यह समिति सीमावर्ती इलाकों सहित पूरे देश में जनसंख्या के ढांचे में हो रहे बदलावों का बारीकी से अध्ययन करेगी और इसे संतुलित करने के उपाय सुझाएगी.

शाह के मुताबिक, इस बदलाव का सबसे बुरा असर पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में देखने को मिल रहा है. उन्होंने बंगाल चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वहां बीजेपी की सरकार बनते ही सबसे पहला काम सीमा पर फेंसिंग (बाड़ लगाने) का काम पूरा करना और घुसपैठियों को बाहर निकालना होगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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