केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के असम दौरे ने राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई क्रांति की नींव रख दी है. रविवार को शाह ने गुवाहाटी में 2,092 करोड़ रुपये की लागत वाली कई बड़ी स्वास्थ्य परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. इसमें सबसे अहम रहा नवनिर्मित प्राग्ज्योतिषपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का लोकार्पण. इस मौके पर शाह ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की जमकर सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में असम का स्वास्थ्य ढांचा अब गुजरात और महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्यों के बराबर पहुंच गया है.
कैंसर के खिलाफ क्या है ‘असम मॉडल’?
कार्यक्रम के दौरान राज्य में कैंसर के इलाज के लिए तैयार किए जा रहे विशाल नेटवर्क की चर्चा प्रमुखता से हुई. सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि रतन टाटा और अमित शाह के साझा विजन के कारण आज असम में 17 कैंसर अस्पताल बनाने की योजना पर काम चल रहा है, जिनमें से 12 अस्पताल सेवा के लिए तैयार हो चुके हैं. टाटा ट्रस्ट और सरकार की 50-50 फीसदी की भागीदारी वाला यह मॉडल पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है. शाह ने कहा कि अब कैंसर के मरीजों को इलाज के लिए मुंबई या दिल्ली भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
कार में सीएम हिमंत से क्या हुई बातचीत?
अमित शाह ने जनसभा में एक दिलचस्प वाकया साझा किया. उन्होंने बताया कि जब वे सीएम हिमंत के साथ कार में आ रहे थे, तब हिमंत ने अपने दिल की बात साझा की. हिमंत ने कहा कि उनका लक्ष्य असम को ऐसा ‘मेडिकल डेस्टिनेशन’ बनाना है जहां इलाज के लिए किसी मरीज को राज्य से बाहर न जाना पड़े. बल्कि, ऐसी सुविधाएं विकसित की जाएं कि पश्चिम बंगाल और पूरे पूर्वोत्तर के गरीब मरीज खुद इलाज के लिए असम आएं. इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए शाह ने गोलाघाट, तिनसुकिया, दिफू और जोरहाट जैसे इलाकों में नए सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों और कैंसर केंद्रों की शुरुआत की.
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संसद के दरवाजे पर ‘चाय-पकौड़े’ वाला तंज
अमित शाह ने अपने संबोधन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ा. उन्होंने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है, लेकिन राहुल गांधी वहां चर्चा करने के बजाय दरवाजे पर बैठकर चाय-पकौड़े खाते हैं.
इसके बाद शाह ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा और मोदी का विरोध करते-करते राहुल अब देश को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संसद के बाहर इस तरह की गतिविधियां लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ हैं और देश की जनता ऐसे व्यवहार को कभी स्वीकार नहीं करेगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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