जब भी हम छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य और ‘हिंदवी स्वराज’ की बात करते हैं, तो उस नींव में खड़ी एक महान शक्ति का नाम सबसे पहले आता है, राजमाता जीजाबाई. उन्होंने न केवल एक पुत्र को जन्म दिया, बल्कि एक पूरे राष्ट्र के संकल्प को जन्म दिया. आज उनकी जयंती पर देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है और उनके महान त्याग को नमन किया जा रहा है. इसी अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजमाता जीजाबाई को श्रद्धांजलि अर्पित की.
छत्रपति शिवाजी में भरा साहस और स्वाभिमान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने एक्स हैंडल के जरिए राजमाता जीजाबाई को श्रद्धांजलि अर्पित. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, ‘राजमाता जीजाबाई जी ने छत्रपति शिवाजी महाराज जी में बाल्यकाल से ही साहस, स्वाभिमान और स्वसंस्कृति की रक्षा के संस्कार भरे.
राजमाता जीजाबाई जी ने छत्रपति शिवाजी महाराज जी में बाल्यकाल से ही साहस, स्वाभिमान और स्वसंस्कृति की रक्षा के संस्कार भरे। उन्होंने शिवाजी महाराज जी के मन में हिंदवी स्वराज की स्थापना का संकल्प जागृत कर उन्हें राष्ट्ररक्षा के महान लक्ष्य की ओर प्रेरित किया।
राजमाता जीजाबाई जी की… pic.twitter.com/guoU6xi5sz
— Amit Shah (@AmitShah) January 12, 2026
अमित शाह ने आगे लिखा कि उन्होंने शिवाजी महाराज जी के मन में हिंदवी स्वराज की स्थापना का संकल्प जागृत कर उन्हें राष्ट्ररक्षा के महान लक्ष्य की ओर प्रेरित किया. राजमाता जीजाबाई जी की जयंती पर श्रद्धापूर्वक नमन.
राजमाता जीजाबाई: स्वराज की जननी
राजमाता जीजाबाई (जिजाऊ) का जन्म 12 जनवरी 1598 को महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के सिंदखेड राजा में हुआ था. वह लखुजी जाधव की पुत्री और शाहजी भोसले की पत्नी थीं. लेकिन उनकी पहचान सिर्फ इन रिश्तों तक सीमित नहीं थी; वह एक कुशल राजनीतिज्ञ, दूरदर्शी प्रशासक और शिवाजी महाराज की सबसे बड़ी गुरु थीं.
शिवाजी महाराज के चरित्र का निर्माण
जब शिवाजी महाराज छोटे थे, तब जीजाबाई उन्हें रामायण और महाभारत की वीर कथाएं सुनाया करती थीं. वह उन्हें सिर्फ कहानियां नहीं सुनाती थीं, बल्कि उनके भीतर यह बीज बोती थीं कि धर्म और संस्कृति की रक्षा करना ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म है. उस दौर में जब पूरा देश विदेशी आक्रांताओं के अधीन था, जीजाबाई ने ‘स्वराज’ का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए अपने पुत्र को तैयार किया.
नारी शक्ति की प्रतीक
जीजाबाई का जीवन संघर्षों और बलिदानों की एक लंबी गाथा है. उन्होंने सिखाया कि एक मां चाहे तो अपने बच्चों के माध्यम से इतिहास की धारा बदल सकती है. आज जो हम हिंदवी स्वराज का गौरवशाली इतिहास पढ़ते हैं, वह जीजाबाई के दिए हुए उन संस्कारों की ही देन है.
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-भारत एक्सप्रेस
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