राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के तीसरे सरसंघचालक मधुकर दत्तात्रय देवरस, जिन्हें पूरा देश आदर से ‘पूजनीय बालासाहब देवरस’ के नाम से जानता है, की आज पुण्यतिथि है. इस मौके पर देश भर में उन्हें याद किया जा रहा है. भारतीय राजनीति और सामाजिक सुधारों के इतिहास में बालासाहब का नाम एक ऐसे संगठनकर्ता के रूप में दर्ज है, जिन्होंने समाज को जोड़ने के लिए अपना पूरा जीवन खपा दिया. उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है. शाह ने बालासाहब के योगदान को याद करते हुए उन्हें सामाजिक समरसता (सोशल हार्मनी) का एक बड़ा पैरोकार बताया.
अस्पृश्यता को मानते थे सबसे बड़ा अभिशाप
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बालासाहब देवरस जी को नमन करते हुए लिखा, ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक, पूजनीय बालासाहब देवरस जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन. राष्ट्रसेवा, सामाजिक समरसता और युवाओं के चरित्र निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले बालासाहब देवरस जी अस्पृश्यता को सबसे बड़ा अभिशाप मानते थे.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक, पूजनीय बालासाहब देवरस जी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन।
राष्ट्रसेवा, सामाजिक समरसता और युवाओं के चरित्र निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले बालासाहब देवरस जी अस्पृश्यता को सबसे बड़ा अभिशाप मानते थे। आपातकाल के कठिन दिनों में भी संघ को… pic.twitter.com/YGnP6l94mB— Amit Shah (@AmitShah) June 17, 2026
अमित शाह ने आगे लिखा कि आपातकाल के कठिन दिनों में भी संघ को आकार देने वाले और युवाओं को लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रेरित करने वाले बालासाहब हम सभी की प्रेरणा बने रहेंगे.’
छुआछूत के खिलाफ उठाई थी बुलंद आवाज
एक ऐसे समय में जब समाज जातियों में बंटा हुआ था, बालासाहब ने साफ शब्दों में कहा था- ‘यदि छुआछूत पाप नहीं है, तो दुनिया में कुछ भी पाप नहीं है.’ उन्होंने संघ के भीतर और बाहर बड़े पैमाने पर सामाजिक सुधारों की वकालत की. उनका मानना था कि जब तक समाज का हर तबका एक साथ नहीं आएगा, तब तक एक मजबूत राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती. उन्होंने दलित और पिछड़े वर्गों को गले लगाने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया.
जेल में होने के बावजूद नहीं टूटा हौसला
अमित शाह ने अपने ट्वीट में ‘आपातकाल’ (Emergency) का विशेष जिक्र किया है, जो भारतीय लोकतंत्र का एक काला अध्याय माना जाता है. 1975 में जब देश में आपातकाल लागू हुआ और संघ पर प्रतिबंध लगा दिया गया, तब बालासाहब देवरस जी ही संघ के मुखिया थे. उन्हें गिरफ्तार कर यरवदा जेल में डाल दिया गया था.
जेल की सलाखों के पीछे होने के बावजूद उनका हौसला नहीं टूटा. उन्होंने जेल से ही युवाओं और स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन किया. उन्होंने देश में लोकतंत्र की बहाली के लिए चलाए गए सत्याग्रह और नागरिक अधिकारों के आंदोलन में संघ की शक्ति को झोंक दिया. उन्होंने न सिर्फ संगठन को बिखरने से बचाया, बल्कि देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए युवाओं के भीतर एक नई ऊर्जा भर दी.
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-भारत एक्सप्रेस
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