केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजभाषा विभाग के एक कार्यक्रम में भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी को बढ़ावा देने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा, विशेषकर विदेशी भाषा का विरोध नहीं होना चाहिए, लेकिन भारतीय भाषाओं को बोलने, सम्मान देने और सोचने का आग्रह हर किसी को करना चाहिए.
हिंदी अन्य भाषाओं की प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगी
गृह मंत्री अमित शाह ने जोर देकर कहा कि हिंदी किसी भी भारतीय भाषा की विरोधी नहीं, बल्कि सभी की सखी है. उन्होंने जोर दिया कि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएं मिलकर भारत के आत्मगौरव को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती हैं.
विदेशी भाषा न तो भारत की संस्कृति, न इतिहास
गृह मंत्री अमित शाह ने 19 जून को दिए अपने बयान को दोहराते हुए कहा कि जो लोग अंग्रेजी बोलते हैं, उन्हें जल्द शर्मिंदगी महसूस होगी. उनका मानना है कि विदेशी भाषा न तो भारत की संस्कृति, न इतिहास और न ही धर्म को समझने में पर्याप्त है. उन्होंने भाषा को भारत को एकजुट करने का माध्यम बनाने की बात कही, क्योंकि अतीत में इसे बांटने के लिए इस्तेमाल करने की कोशिशें हुईं, जो सफल नहीं रहीं.
गृह मंत्री अमित शाह ने चार प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला-
पहला, भारतीय भाषाओं को एकजुटता का साधन बनाना, जिसके लिए राजभाषा विभाग काम करेगा.
दूसरा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक महान भारत के निर्माण के लिए भारतीय भाषाओं का विकास और समृद्धि सुनिश्चित करना.
तीसरा, सरकारी कामकाज में भारतीय भाषाओं के अधिक इस्तेमाल को बढ़ावा देना, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों को शामिल करना. इसके लिए राज्यों से सहयोग की अपील की जाएगी.
चौथा, मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई स्थानीय भाषाओं में शुरू करना, जिसमें केंद्र सरकार राज्यों की हरसंभव मदद करेगी.
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