Arunachal Pradesh News: अपने खूबसूरत पहाड़ों और घाटियों के लिए प्रसिद्ध पूर्वोत्तर का अरुणाचल प्रदेश अब अपहरण और फिरौती के लिये चर्चाओं में है. कुछ दिन पहले ही यहां राजस्थान के एक कॉन्ट्रैक्टर का अपहरण कर लिया गया और फिरौती की रकम मिलने के बाद ही उसे रिहा किया गया.
एक शांत प्रदेश के रूप में पहचाने जाने वाले अरुणाचल प्रदेश में अपहरण और फिरौती नया ट्रेंड बनकर उभरा है. इसकी जद में तिराप, चांग्लांग और लोग्दिंग जिले हैं. जहां पर अपहरण एक नया कारोबार बन गया है.
कौन चला रहा यह सिंडिकेट?
अरुणाचल प्रदेश में अपहरण का यह उद्योग मुख्यत: म्यांमार के सीमावर्ती जिलों में ही फल-फूल रहा है. जहां पर सीमा पार से नगा उग्रवादी संगठन NSCN के उग्रवादी समानांतर सरकार चला रहे हैं. एनएससीएन के उग्रवादी सीमापार से इन इलाकों में घुसते हैं और कॉन्ट्रैक्टर, व्यापारियों और नेताओं को निशाना बनाते हैं.
एक अनुमान के मुताबिक नगा उग्रवादियों के द्वारा संचालित यह सिंडिकेट फिरौती के माध्यम से सालाना 50 से 100 करोड़ रुपये तक वसूल रहे हैं. उग्रवादियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में बिना रकम लिए वो पीड़ितों को नहीं छोड़ते हैं.
सालाना टैक्स कहते हैं उग्रवादी?
नगा उग्रवादियों ने इसे सालाना टैक्स या निर्माण टैक्स नाम दिया है. इनके निशाने पर सड़क-पुल बनाने वाली कंपनियां, कॉन्ट्रैक्टर्स, व्यापारी, स्थानीय नेता और सरकारी कर्मचारी होते हैं. इन इलाकों में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अधिकतर विकास योजनाएं इनके खौफ के चलते ठप पड़ गई हैं. म्यांमार पर जब से सेना ने नियंत्रण लिया है तब से इनपर लगाम लगाना भारत के लिए मुश्किल हो गया है. हाल के सालों में ये उग्रवादी ड्रोन का इस्तेमाल कर भारतीय सेना की गतिविधियों का पता लगाते हैं और उसके बाद अपने काम को अंजाम देते हैं. जिसकी वजह से भारतीय बलों का इन इलाकों पर पहुंच कम हो गया है.
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भारतीय सुरक्षा बलों के पास क्या है चुनौती?
भारत-म्यांमार के बीच करीब 1643 किलोमीटर लंबी सीमा अभी भी खुला हुआ है. जहां घने जंगल, ऊंचे-ऊंचे पहाड़ मौजूद हैं. इन इलाकों में भारतीय सेना के पास खुफिया तंत्र कमजोर हैं. जिसकी वजह से भारतीय सेना को कार्रवाई करने में काफी मुश्किलें आती हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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