अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से करोड़ों भक्तों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार योगदान दिया. इसी कड़ी में प्रतापगढ़ के समाजसेवी सियाराम उमरवैश्य ने अपनी जमीन बेचकर एक करोड़ रुपये की राशि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दान दी थी. उन्होंने दावा किया था कि वे इस ट्रस्ट को इतनी बड़ी रकम देने वाले पहले व्यक्ति हैं.
आस्था से जुड़ा फैसला
सियाराम उमरवैश्य ने बताया था कि 75 साल की उम्र पार करने के बाद उन्होंने सोचा कि जीवन का भरोसा नहीं होता. इसलिए उन्होंने अपनी जमीन बेचकर भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण में योगदान देना ही उचित समझा. उस समय उन्हें गर्व था कि वे इस ऐतिहासिक कार्य का हिस्सा बने.
अब क्यों हो रहा है अफसोस?
कुछ समय पहले तक वे कहते थे कि मंदिर निर्माण देखना उनके जीवन की सबसे बड़ी इच्छा थी. अब उनका रुख बदल गया है. उन्होंने हाल ही में स्वीकार किया कि उन्हें अपने इस फैसले पर पछतावा हो रहा है. हालांकि उन्होंने इसके पीछे का कारण साफ-साफ नहीं बताया.
सोशल मीडिया और राजनीति में चर्चा
सियाराम उमरवैश्य के इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस छेड़ दी है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि जो व्यक्ति अपनी पूरी संपत्ति भगवान राम के नाम कर चुका था वही अब अफसोस जता रहा है.
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राम मंदिर निर्माण के लिए दिया गया यह दान उस समय श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक था. अब समाजसेवी का बदला हुआ रुख लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है. उनके इस बयान ने मंदिर निर्माण से जुड़ी भावनाओं और दान की परंपरा पर नई चर्चा शुरू कर दी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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