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ओमान की जेल में 15 महीनों से बंद युवक, परिवार ने प्रशांत किशोर से की रिहाई की अपील

नौकरी का तलाश में बेतिया का युवक ओमान गया था. वहां कानूनी या स्पॉन्सरशिप से जुड़ी समस्या की वजह से 15 महीना से जेल में बंद है, परेशान मां ने प्रशांत किशोर से मदद की गुहार लगाई है, जिसपर प्रशांत किशोर ने हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया.

जितेन्द्र कुमार/ बेतिया: पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया का एक युवक रोजगार की तलाश में ओमान गया था, लेकिन वहां कथित कानूनी या स्पॉन्सरशिप संबंधी समस्या में फंसकर पिछले 15 महीनों से जेल में बंद है. परेशान परिवार ने बेतिया पहुंचे जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर से मुलाकात कर बेटे की रिहाई के लिए मदद की गुहार लगाई.प्रशांत किशोर ने हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है, जबकि स्थानीय टीम विदेश मंत्रालय और मस्कट स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क की तैयारी में जुट गई है.

रोजगार की तलाश में गया था

बेतिया का रहने वाला युवक परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से ओमान गया था. लेकिन वहां पहुंचने के बाद वह कानूनी या स्पॉन्सरशिप से जुड़ी समस्या में फंस गया. बताया जा रहा है कि ओमान के सख्त लेबर कानून के तहत दस्तावेज़ों में गड़बड़ी होने पर उसे जेल भेज दिया गया. युवक पिछले 15 महीनों से ओमान की जेल में बंद है. इस खबर से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में परिजन बेटे को भारत वापस लाने की गुहार लगाते हुए नजर आ रहे हैं.

हर संभव मदद का आश्वासन दिया

जब परिजनों को जानकारी मिली कि जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर बेतिया के सर्किट हाउस पहुंचे हैं, तो वे उनसे मिलने वहां पहुंच गए. परिवार ने प्रशांत किशोर से विदेश मंत्रालय (MEA) और मस्कट स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क कर बेटे की रिहाई में मदद करने की अपील की. प्रशांत किशोर ने परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है. वहीं, जन सुराज के नेता मनीष कश्यप ने भी मामले को गंभीरता से लिया और कहा कि उचित दस्तावेजों और आधिकारिक माध्यम से पहल करने पर रिहाई का रास्ता निकल सकता है.

रिहाई की प्रक्रिया शुरू

सूत्रों के अनुसार, पश्चिम चंपारण में जन सुराज की स्थानीय टीम परिवार से जरूरी कागजात एकत्र कर रही है. इन दस्तावेजों को विदेश मंत्रालय और मस्कट स्थित भारतीय दूतावास को भेजा जाएगा. दूतावास के अधिकारी जेल में बंद भारतीय नागरिकों से मिलकर उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध करा सकेंगे. जिससे परिवार की उम्मीद बढ़ गई है कि राजनीतिक हस्तक्षेप और राजनयिक प्रयासों से उनके बेटे की रिहाई की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है. यह मामला एक बार फिर खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़ा करता है.

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-भारत एक्सप्रेस

Edited By: Shubhra Rai (Intern)

 



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