अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि राजस्थान में मंदिरों के चढ़ावे को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. यहां के नागौर के बुटाटी धाम के बाद अब भरतपुर के मशहूर श्री बांके बिहारीजी मंदिर में दान-पुण्य के हिसाब-किताब पर सवाल उठ रहे हैं. सरकारी महकमे के अधीन होने के बावजूद चढ़ाए गए चंदे का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है.
पुजारी के भरोसे रजिस्टर
दरअसल, इस प्रसिद्ध मंदिर में पिछले एक साल से भक्तों को दान की कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी जा रही है. यही नहीं, मंदिर का जो स्टॉक रजिस्टर सरकारी कर्मचारियों की देखरेख में होना चाहिए था, उसे पूरी तरह मंदिर के पुजारी के भरोसे छोड़ दिया गया है.
देवस्थान विभाग के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया होने के बाद भी व्यवस्था का यह हाल देखकर स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में भारी गुस्सा है. लोगों का कहना है कि नकद चंदे और कीमती आभूषणों का कोई लेखा-जोखा न होना कई तरह की आशंकाओं को जन्म देता है.
कैसे भड़का मामला?
भरतपुर के रंजीत नगर के एक तेल कारोबारी परिवार की बुजुर्ग महिला ने दिल्ली के करोल बाग से एक कीमती हीरा खरीदा था. दिसंबर 2024 में उन्होंने इस हीरे को भगवान बांके बिहारी की प्रतिमा की नाक में ‘लौंग’ के रूप में पहनाया था.
करीब छह महीने बाद जब यह परिवार दोबारा दर्शन करने पहुंचा, तो उन्हें भगवान की नाक में चमक रहे हीरे को देखकर शक हुआ. उन्हें लगा कि असली हीरे की जगह वहां कोई नकली कांच का टुकड़ा लगा दिया गया है. जब परिवार ने इसकी शिकायत करनी चाही, तो पता चला कि देवस्थान विभाग ने उन्हें हीरा दान करने की कोई रसीद ही नहीं दी थी.
इस घटना के बाद मंदिर में चढ़ावे और पुराने दानों के गायब होने की कड़ियां जुड़ने लगीं और पूरा विवाद गर्मा गया. अब स्थानीय लोग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने की मांग कर रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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