बिहपुर सीट का 'अभूतपूर्व शाप'
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के माहौल में भागलपुर की बिहपुर (Bihpur Assembly Seat) केंद्र में है. बिहपुर की राजनीतिक मिट्टी पर किसी भी पार्टी की जड़ें गहरी नहीं जम पाई हैं. 1952 से अब तक यहां सत्ता परिवर्तन का एक लंबा इतिहास रहा है. पिछले एक दशक में बीजेपी और आरजेडी के बीच हर बार कांटे की टक्कर रही है, जहां जीत का अंतर अक्सर बेहद मामूली रहा है. 2025 में जब एनडीए अपनी पिछली जीत बचाने की जद्दोजहद में है और महागठबंधन विकास को हथियार बना रहा है, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहपुर का सजग मतदाता इस बार अनुभव को चुनता है या परिवर्तन की ओर झुकता है.
भागलपुर जिला मुख्यालय से करीब 19 किलोमीटर दूर बसे बिहपुर, नवगछिया और सुल्तानगंज के आसपास यह विधानसभा क्षेत्र आता है. इसे 1951 में बनाया गया था और इसमें नारायणपुर, बिहपुर और खरीक प्रखंड शामिल हैं. यहां की राजनीति हमेशा उतार-चढ़ाव भरी रही है.
तीसरी जीत है टेढ़ी खीर
भागलपुर जिले की बिहपुर सीट एक बार फिर सुर्खियों में है. सबसे खास बात यह है कि इस सीट से लगातार तीसरी बार किसी पार्टी ने जीत हासिल नहीं की है. गंगा, कोसी और बूढ़ी गंडक जैसी जीवनदायिनी नदियों से घिरा यह क्षेत्र अपनी उपजाऊ मिट्टी के लिए जाना जाता है, लेकिन हर साल आने वाली बाढ़ की विभीषिका और रोजगार के लिए युवाओं का पलायन, यहां के मतदाताओं की सबसे बड़ी पीड़ा है.
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इतिहास में बार-बार बदली बाजी (Bihar Election History)
1952 से अब तक हुए 17 चुनावों में शुरूआती दौर (1952-1969) में किसी पार्टी को लगातार दो बार जीत नहीं मिली. कभी कांग्रेस तो कभी सीपीआई और जनसंघ ने बाजी मारी. 1969 के बाद रुझान बदला सीपीआई ने 1969 से 1977 तक, कांग्रेस ने 1980 से 1985 तक, जनता दल ने 1990 से 1995 तक और राजद ने 2000 से 2005 तक लगातार दो-दो बार जीत हासिल की. हालांकि, लगातार तीसरी बार यहां कोई नहीं आ पाया.
बीजेपी और राजद के बीच सीधी टक्कर
पिछले दस साल में बिहपुर सीट पर मुकाबला बीजेपी और राजद के बीच सिमट गया है. 2010 में बीजेपी ने मात्र 465 वोटों से जीत हासिल की, 2015 में राजद ने 12,716 वोटों से वापसी की और 2020 में बीजेपी फिर से 6,129 वोटों से आगे रही. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में जदयू को यहां से सिर्फ 4,855 वोटों की बढ़त मिली, जो इस बात का संकेत है कि 2025 में एनडीए के लिए राह आसान नहीं होगी.
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बिहपुर का मतदाता समीकरण
चुनाव आयोग के मुताबिक, बिहपुर की आबादी करीब 4.52 लाख है, जिनमें 2.68 लाख पंजीकृत मतदाता हैं. इनमें 1.41 लाख पुरुष, 1.26 लाख महिलाएं और 22 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं. यहां के वोटर आमतौर पर खेती, बाढ़ और बेरोजगारी जैसे स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखकर वोट करते हैं. हर साल आने वाली बाढ़ से किसानों की कमर टूट जाती है, और रोजगार की कमी के चलते युवाओं का पलायन बढ़ता जा रहा है.
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Bihar Election 2025 में फिर होगा कड़ा मुकाबला
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बार बिहपुर में मुकाबला काफी कांटे का रहेगा. एनडीए अपनी पिछली जीत बचाने की कोशिश में जुटा है, जबकि महागठबंधन विकास और रोजगार के मुद्दों पर जनता का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता किसे मौका देते हैं, लेकिन इतना तय है कि बिहपुर एक बार फिर बिहार की सियासत का हॉटस्पॉट बनने वाला है.
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