Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव का ऐलान भले ही न हुआ हो, लेकिन सियासत में अब पूरी तरह चुनावी रंग दिखाई देने लगा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के पटना में समापन के दो दिन बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दिवंगत मां हीराबेन पर की गई अभद्र टिप्पणी को महिलाओं की अस्मिता से जोड़ते हुए चुनावी एजेंडा सेट कर दिया. इसके बाद से राजनीतिक तापमान लगातार चढ़ता जा रहा है.
आपको बता दें बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बीजेपी की अहम बैठक करीब 3 घंटे तक चली. इस बैठक में बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े समेत तमाम बड़े नेता मौजूद रहे.
समीकरण पिछली बार से कहीं ज्यादा मजबूत
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सीट बंटवारे को लेकर डिटेल चर्चा हुई. हालांकि इस बार समीकरण पिछली बार से कहीं ज्यादा मजबूत हैं. 2020 में बीजेपी और जेडीयू के बीच सीधे तौर पर सीटों का बंटवारा हुआ था, लेकिन इस बार चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी भी साथ है. ऐसे में गठबंधन के भीतर तालमेल बैठाना बीजेपी के लिए आसान नहीं दिख रहा है.
दूसरी तरफ, पटना में तेजस्वी यादव ने पार्टी विधायकों की बैठक बुलाई है. राजद खेमे में भी चुनावी तैयारी को लेकर जोरशोर से रणनीति बनाई जा रही है. तेजस्वी की बैठक को लेकर महागठबंधन खेमे में हलचल तेज हो गई है और प्रदेश का सियासी पारा और ऊपर चढ़ गया है.
जीतन राम मांझी की मांग
इधर, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने NDA के भीतर सीटों को लेकर बड़ा बयान दे दिया है. मांझी ने साफ कहा कि अगर NDA गठबंधन उनके साथ ईमानदारी बरतना चाहता है तो उन्हें कम से कम 20 सीटें दी जानी चाहिए. मांझी का कहना है कि ‘हमारे कार्यकर्ताओं और आम जनता की भी यही मांग है कि हमें ऐसी सीटें मिलें, जहां से हम सम्मानजनक तरीके से चुनाव लड़ सकें. अगर एनडीए सचमुच हमें महत्व देना चाहता है, तो यह कम से कम 20 सीटों से शुरू होना चाहिए.’
कब होंगे चुनाव?
बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों पर चुनाव अक्टूबर-नवंबर में होने की संभावना है. एक ओर एनडीए खेमे में बीजेपी और जेडीयू 100-100 से ज्यादा सीटों पर दावेदारी कर रहे हैं, वहीं चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जैसे सहयोगी दल भी अपनी हिस्सेदारी के लिए दबाव बना रहे हैं. दूसरी तरफ महागठबंधन के सामने भी यही चुनौती है कि किस तरह सीट बंटवारे में सभी सहयोगियों को साधा जाए. साफ है कि बिहार की राजनीति में अभी से तकरार और जोड़तोड़ की बिसात बिछ चुकी है. चुनाव की घोषणा होते-होते यह मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो जाएगा.
Also Follow Bharat Express on X
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




