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किसने कहा बिहार में खूब बिकेगी शराब? मद्य निषेध मंत्री बोले- यहां शराबबंदी खत्म नहीं होगी, अब दूसरे राज्यों की शराब कंपनियों पर भी FIR होगी

BIHAR LIQUOR BAN NOT ENDING: बिहार के मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने सोशल मीडिया पर चल रही शराबबंदी खत्म होने की चर्चाओं को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य में शराबबंदी कानून लागू रहेगा और दूसरे राज्यों की शराब बनाने वाली कंपनियों पर भी अब FIR दर्ज होगी.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

BIHAR LIQUOR BAN: बिहार में शराबबंदी कानून समाप्त होने या इसमें किसी भी तरह की ढील दिए जाने से जुड़ी चल रही तमाम अफवाहों पर राज्य सरकार ने पूर्ण विराम लगा दिया है. बिहार के मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने आज स्पष्ट कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून खत्म नहीं होगा. यह कानून पहले भी लागू था, आज भी पूरी तरह से लागू है और भविष्य में भी जारी रहेगा.

मदन सहनी ने सोशल मीडिया पर शराबबंदी हटाने को लेकर फैलाई जा रही खबरों को पूरी तरह से भ्रामक और निराधार बताया. उन्होंने कहा कि मद्य निषेध विभाग के स्तर पर इस कानून की समय-समय पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जाती है.

दूसरे राज्यों की शराब निर्माता कंपनियों पर कसेगा शिकंजा

पड़ोसी राज्यों से सीमा पार कराकर बिहार लाई जाने वाली शराब पर नकेल कसने के लिए सरकार ने एक नया और कड़ा कदम उठाया है. मंत्री मदन सहनी ने बताया कि अब केवल शराब तस्करों या ड्राइवरों पर ही कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि बिहार में पकड़ी जाने वाली अवैध विदेशी शराब जिस कंपनी द्वारा बनाई गई होगी, उस कंपनी के खिलाफ भी सीधी प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी.

उन्होंने कहा कि विभाग को इस संबंध में सख्त निर्देश दे दिए गए हैं और इस पर अमल शुरू भी हो चुका है. इसके साथ ही, सूखे नशे (हेरोइन, स्मैक, गांजा) के खिलाफ भी राज्य में लगातार छापेमारी जारी है और जब्ती के आंकड़ों में भारी बढ़ोतरी हुई है.

नवादा में आज 600 लीटर विदेशी शराब बरामद

पकड़ा गया शराब का गुप्त तहखाना, 10 लाख की खेप बरामद

शराबबंदी को लेकर एक तरफ जहां मद्य निषेध विभाग दूसरे राज्यों की कंपनियों पर शिकंजा कसने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर तस्कर राज्य में शराब की खेप पहुंचाने के लिए नए-नए और शातिर तरीके अपना रहे हैं. ताजा मामला नवादा जिले के रजौली का है, जहां पुलिस ने कोयले से लदे एक ट्रक में बनाए गए विशेष तहखाने से करीब 600 लीटर विदेशी शराब बरामद की है.

नवादा एसपी अभिनव धीमान के निर्देश पर चलाए गए चेकिंग अभियान के तहत करिगांव टोल प्लाजा के पास ट्रक को रोका गया. जब जांच की गई तो कोयले के डस्ट के नीचे और केबिन के पीछे बेहद शातिराना अंदाज में बने गुप्त तहखाने से 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य की विदेशी शराब के कार्टन बरामद हुए.

पुलिस ने मौके से चालक कुंदन कुमार और खलासी रौशन कुमार (दोनों निवासी नालंदा) को गिरफ्तार कर लिया है. शुरुआती पूछताछ में खुलासा हुआ है कि शराब की यह बड़ी खेप पश्चिम बंगाल के आसनसोल से बिहार लाई जा रही थी. फिलहाल पुलिस उत्पाद अधिनियम के तहत केस दर्ज कर यह पता लगा रही है कि यह शराब बिहार के किस जिले में डिलीवर की जानी थी.

बिहार: शराबबंदी कब और किस सरकार ने लागू की?

बिहार में 1 अप्रैल 2016 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए/महागठबंधन सरकार ने पूर्ण शराबबंदी की ऐतिहासिक घोषणा की थी. शुरुआत में देशी शराब पर रोक लगाई गई, जिसे 5 अप्रैल 2016 से विस्तृत करते हुए संपूर्ण बिहार में विदेशी शराब समेत हर प्रकार के मादक पदार्थों की बिक्री, निर्माण, भंडारण और सेवन को पूरी तरह गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध घोषित कर दिया गया (Bihar Prohibition and Excise Act, 2016).

शराबबंदी का सूबे और समाज पर क्या असर पड़ा?

मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी के अनुसार, पिछले एक दशक से लागू शराबबंदी और नशाबंदी के राज्य में व्यापक सकारात्मक सामाजिक परिणाम देखने को मिले हैं:

परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार: पहले गरीब, अति पिछड़ा, दलित और वंचित वर्ग के लोग रोजाना 400-500 रुपये की अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा शराब में उड़ा देते थे. अब यह पैसा बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घरेलू राशन पर खर्च हो रहा है.

घरेलू हिंसा में कमी: शराबबंदी के बाद से राज्य में महिलाओं के खिलाफ होने वाली घरेलू हिंसा और शारीरिक उत्पीड़न के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है.

महिला सशक्तिकरण: महिलाओं की मांग पर ही इस कानून को लागू किया गया था, जिससे ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के सामाजिक वातावरण में शांति आई है.

Old Liquor Bottle Price
प्रतीकात्मक तस्वीर

कठोर कानून के बावजूद शराब से मौतों की त्रासदी

पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद बिहार में समानांतर रूप से अवैध शराब माफिया और ‘ड्राय स्टेट’ का काला बाजार पनपा है. आबकारी विभाग और पुलिस की लाख कोशिशों के बावजूद राज्य के अलग-अलग जिलों से जहरीली शराब (Spurious Liquor) पीने से लोगों की सामूहिक मौतों (Tragydies) के मामले सामने आते रहे हैं.

अवैध देशी शराब में जहरीले केमिकल्स और मिथाइल अल्कोहल (Methanol) की मिलावट के कारण कई बड़ी घटनाएं हुई हैं.

बीते 10 वर्षों में जहरीली शराब से जुड़े बड़े मामले

वर्ष / समय प्रमुख प्रभावित जिले / क्षेत्र अनुमानित मौतों की संख्या
2016 गोपालगंज (खजूरबानी कांड) 19 मौतें
2021 गोपालगंज, पश्चिम चंपारण (बेतिया), मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर 50+ मौतें
2022 (मार्च-अप्रैल) भागलपुर, बांका, मधेपुरा 35+ मौतें
2022 (दिसंबर) सारण (छपरा), सिवान, बेगूसराय (सबसे बड़ा हादसा) 80+ मौतें
2023 मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) 30+ मौतें
2024 (अक्टूबर) सिवान और सारण (छपरा) 35+ मौतें

(नोट: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) एवं स्थानीय मीडिया/प्रशासनिक रिपोर्टों के आधार पर ब्योरा.)

यह भी पढ़िए: लक्षद्वीप में शराबबंदी खत्म! आखिर सरकार ने क्यों लिया ऐसा फैसला? गुस्से में आए लोग, जानें नए नियम की वजह



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