केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी.
रिपोर्ट- आशुतोष
बिहार में शराबबंदी का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है. इस बार केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर हमला बोलते हुए कई गंभीर सवाल उठाया हैं. मांझी के बयान के बाद राज्य की सियासत और तेज होती नजर आ रही है.
मांझी ने कहा कि तेजस्वी यादव को यह बताना चाहिए कि आखिर बालू और शराब माफिया कौन हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर उंगली उठाई जा रही है, वे दरअसल उन्हीं के करीबी हैं.
मांझी ने तंज कसते हुए कहा,
“पहले खुद गड़बड़ी करते हैं और फिर उसी पर हंगामा भी खड़ा कर देते हैं.”
मांझी ने यह भी याद दिलाया कि बिहार में शराबबंदी का फैसला किसी एक पार्टी का नहीं था, बल्कि सभी की सहमति से लिया गया था. लेकिन उनका कहना है कि इस कानून को जमीन पर सही तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा हालात में सबसे ज्यादा परेशानी गरीबों को झेलनी पड़ रही है.
उनके मुताबिक, छोटे-छोटे मामलों में गरीब लोगों को जेल भेज दिया जाता है, जबकि बड़े स्तर पर शराब की तस्करी करने वाले लोग खुलेआम घूमते नजर आते हैं. यह व्यवस्था न सिर्फ अन्यायपूर्ण है, बल्कि कानून के मकसद पर भी सवाल खड़े करती है.
पुलिस पर भी उठाया सवाल
मांझी ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब हैं कि 2000 लीटर शराब रखने वाले बड़े माफिया तक बच निकलते हैं, जबकि आधा लीटर शराब रखने वाला गरीब सीधे जेल पहुंच जाता है. उन्होंने इसे सिस्टम की बड़ी खामी बताया है.
उन्होंने मुख्यमंत्री की उस समीक्षा बैठक का भी जिक्र किया, जिसमें निर्देश दिया गया था कि कम मात्रा में शराब के साथ पकड़े गए लोगों पर जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाए. लेकिन मांझी का आरोप है कि इस निर्देश का पालन सही तरीके से नहीं हो रहा.
निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
मांझी ने सरकार से अपील किया कि शराबबंदी कानून को निष्पक्ष और समान रूप से लागू किया जाए. उनका कहना है कि जब तक कानून का पालन बिना भेदभाव के नहीं होगा, तब तक इसका असली उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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