रिपोर्ट- राजेश चौधरी
बिहार के सुपौल जिले में प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है. गुरुवार (5 मार्च) को डीएम सावन कुमार ने छातापुर प्रखंड के अलग-अलग सरकारी दफ्तरों का अचानक निरीक्षण किया. सुबह करीब 11:45 बजे वे प्रखंड सह अंचल कार्यालय और मनरेगा कार्यालय पहुंचे. डीएम के पहुंचते ही कर्मचारियों में हड़कंप मच गया. कई दफ्तरों में ताला लटका मिला और कई कर्मचारी अपनी सीट पर मौजूद नहीं थे.
सरकारी दफ्तर मिला खाली
जांच के दौरान बीडीओ और मनरेगा पीओ दफ्तर से गायब मिले. सूचना मिलने पर सीओ जल्दी-जल्दी कार्यालय पहुंचे, लेकिन उन्हें मुख्य गेट से अंदर नहीं जाने दिया गया. बाद में वे पीछे के रास्ते से अंदर आए. इस पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए उन्हें फटकार लगाई. जब बीडीओ की गैरमौजूदगी के बारे में पूछा गया तो सीओ ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कई कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित थे. यहां तक कि ठेका पर काम करने वाले कर्मचारी भी दफ्तर में नहीं थे. डीएम उस समय चौंक गए, जब उनके आने के बाद सफाईकर्मी झाड़ू लगाते दिखे. इससे साफ था कि दफ्तर में नियमित साफ-सफाई भी समय पर नहीं हो रही थी.
डीएम बार-बार बीडीओ डॉ. राकेश गुप्ता के बारे में पूछते रहे. ऐसा लग रहा था कि वे बिना छुट्टी लिए ही दफ्तर से गायब हैं. पूरे मामले को देखने के बाद डीएम काफी नाराज दिखे.
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सैलरी में होगी कटौती
सावन कुमार ने साफ कहा कि जो कर्मचारी ड्यूटी से गायब मिले हैं, उनके वेतन से कटौती की जाएगी. वहीं संविदा कर्मियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें नौकरी से हटाया भी जा सकता है. उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि आगे से समय पर दफ्तर आएं और काम में लापरवाही न बरतें.
-भारत एक्सप्रेस
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