Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

‘यह ममता बनर्जी सरकार की क्रूरता को दर्शाता है’, मुर्शिदाबाद हिंसा पर समिति की रिपोर्ट पर सुधांशु त्रिवेदी का हमला

BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने मुर्शिदाबाद हिंसा पर ममता सरकार को घेरा। SIT रिपोर्ट में TMC नेताओं की भूमिका और पुलिस की निष्क्रियता का खुलासा, ग्रामीणों ने सुरक्षा की मांग की.

sudhanshu trivedi

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर कड़ा प्रहार किया है. उन्होंने कहा कि हिंसा की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में यह साफ तौर पर सामने आया है कि हिंसा सुनियोजित रूप से हिंदुओं को निशाना बनाकर की गई थी और इस मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं की भूमिका भी सामने आई है.

त्रिवेदी ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा कि पुलिस प्रशासन की भूमिका बेहद निष्क्रिय रही और उन्होंने टीएमसी नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने हिंसा को रोकने की बजाय टीएमसी नेताओं की गतिविधियों को अनदेखा किया.

सुधांशु त्रिवेदी का ममता सरकार पर तीखा हमला

उन्होंने कहा, “मुर्शिदाबाद से लेकर पहलगाम तक हिंदुओं को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा की एक कड़ी स्पष्ट रूप से नजर आ रही है. मुर्शिदाबाद हिंसा की SIT रिपोर्ट में जिस तरह से तथ्य सामने आए हैं, वह ममता बनर्जी सरकार की हिंदुओं के प्रति क्रूरता और कट्टरपंथियों के प्रति झुकाव को दर्शाता है.”

यह बयान उस समय आया जब कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा गठित फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने मुर्शिदाबाद के बेटबोना गांव में हुई हिंसा को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में बताया गया है कि इस गांव में 113 घर गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि हिंसा के दौरान गांव के अधिकांश लोग मालदा में शरण लेने के लिए मजबूर हुए, लेकिन बाद में पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें वापस गांव लौटने के लिए कहा गया. रिपोर्ट में कहा गया, “हमलों का नेतृत्व एक स्थानीय पार्षद द्वारा किया गया था. उस समय स्थानीय पुलिस पूरी तरह से नदारद और निष्क्रिय रही.”

ग्रामीणों की मांग: सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती

ग्रामीणों ने मांग की है कि उनकी सुरक्षा के लिए गांव में स्थायी बीएसएफ कैंप और केंद्रीय सुरक्षाबल तैनात किए जाएं. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हिंसा के दौरान ग्रामीणों ने पुलिस को शुक्रवार और शनिवार को शाम 4 बजे कॉल किया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. एक ग्रामीण के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि जब वह वापस गांव लौटा तो देखा कि जिन घरों को नहीं जलाया गया था, उन्हें बाद में चिन्हित कर आग के हवाले कर दिया गया.

इसके अलावा, पानी की सप्लाई काट दी गई ताकि आग बुझाई न जा सके. कुछ महिलाओं के पास पहनने के लिए कपड़े तक नहीं बचे क्योंकि हमलावरों ने पूरे घर को केरोसिन डालकर जला दिया था. सबसे गंभीर मामला हरगोविंद दास (74) और उनके बेटे चंदन दास (40) की हत्या का सामने आया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि “हमलावरों ने घर का दरवाजा तोड़कर चंदन को बाहर निकाला और हरगोविंद दास को घर से ले जाकर दोनों पर कुल्हाड़ी से वार किया. एक व्यक्ति वहीं खड़ा रहा जब तक दोनों की मौत नहीं हो गई.” यह रिपोर्ट बंगाल सरकार की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है. बीजेपी का आरोप है कि ममता सरकार हिंदुओं की सुरक्षा में पूरी तरह विफल रही है और तुष्टिकरण की राजनीति में लिप्त है.

ये भी पढ़ें: कांग्रेस की नई रणनीति: राष्ट्रीय सुरक्षा के सवालों पर सरकार को घेरेगी विपक्ष

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital