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केंद्रीय कैबिनेट ने महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश में रेलवे मल्टिट्रैकिंग और आंध्र प्रदेश में 4-लेन हाईवे को दी मंजूरी

केंद्रीय कैबिनेट ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में रेलवे मल्टिट्रैकिंग परियोजनाओं और आंध्र प्रदेश में 4-लेन बद्वेल-नेल्लोर हाईवे के निर्माण को मंजूरी दी, जिससे कनेक्टिविटी, रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा.

Union Minister Ashwini Vaishnav

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव. (फाइल फोटो)

Prashant Rai Edited by Prashant Rai

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में रेलवे और सड़क नेटवर्क को विस्तार देने वाले दो अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इसमें महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में दो मल्टिट्रैकिंग रेलवे परियोजनाएं और आंध्र प्रदेश में 4-लेन बद्वेल-नेल्लोर हाईवे कॉरिडोर के निर्माण को हरी झंडी दी गई.

रेलवे की दोनों परियोजनाओं की कुल लागत करीब 3,399 करोड़ रुपये है और इससे भारतीय रेलवे नेटवर्क में 176 किलोमीटर का इज़ाफा होगा. ये प्रोजेक्ट्स महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के चार जिलों को कवर करेंगे.

स्वीकृत रेल लाइनों में शामिल हैं:

  • रतलाम-नागदा तीसरी और चौथी लाइन
  • वर्धा-बल्लारशाह चौथी लाइन

इन रेल मार्गों का उद्देश्य रेल लाइन की क्षमता बढ़ाकर यात्रियों और माल के आवागमन को तेज़ और सुविधाजनक बनाना है. इन परियोजनाओं से लगभग 784 गांवों को फायदा होगा, जिनकी कुल आबादी करीब 19.74 लाख है.

ये रूट कोयला, सीमेंट, फ्लाई ऐश, जिप्सम, कंटेनर, कृषि उत्पाद और पेट्रोलियम जैसे माल के परिवहन के लिए बेहद अहम हैं.

पर्यावरण और रोजगार को भी लाभ

इन परियोजनाओं के चलते माल परिवहन में 18.40 मिलियन टन प्रति वर्ष की वृद्धि का अनुमान है. साथ ही तेल आयात में 20 करोड़ लीटर की कमी और 99 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कटौती होगी. यह पर्यावरणीय प्रभाव 4 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है.

निर्माण कार्य के दौरान लगभग 74 लाख मानव-दिन का प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है.

आंध्र प्रदेश में बद्वेल-नेल्लोर 4-लेन हाईवे

कैबिनेट ने आंध्र प्रदेश में 108.134 किमी लंबे 4-लेन बद्वेल-नेल्लोर राजमार्ग के निर्माण को भी मंजूरी दी है, जिसकी अनुमानित लागत 3,653.10 करोड़ रुपये है. यह प्रोजेक्ट DBFOT मॉडल (डिज़ाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर) के तहत बनेगा.

यह हाईवे विशाखापत्तनम-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु और चेन्नई-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के बीच रणनीतिक संपर्क बनाएगा और कृष्णापटनम पोर्ट तक सीधी और तेज़ पहुंच सुनिश्चित करेगा.

यात्रा में बचत:

  • दूरी में 34 किलोमीटर की कमी
  • समय में लगभग 1 घंटे की बचत
  • ईंधन की खपत और वाहन परिचालन लागत में गिरावट
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी

यह परियोजना करीब 20 लाख प्रत्यक्ष और 23 लाख अप्रत्यक्ष मानव-दिन का रोजगार उत्पन्न करेगी. इसके साथ ही क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नया बल मिलेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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