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₹100 करोड़ के फर्जी GST रिफंड घोटाले में CBI की बड़ी कार्रवाई, कस्टम के तत्कालीन एडिशनल कमिश्नर रणविजय कुमार समेत 30 पर केस दर्ज

CBI ने ₹100 करोड़ के फर्जी जीएसटी रिफंड घोटाले में कस्टम के तत्कालीन एडिशनल कमिश्नर रणविजय कुमार समेत 30 लोगों पर केस दर्ज किया है.

GST Refund Scam: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने फर्जी निर्यात बिलों के ज़रिए करीब ₹100 करोड़ के जीएसटी रिफंड घोटाले में बड़ा खुलासा करते हुए कस्टम विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त (पटना) रणविजय कुमार समेत कुल 30 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया है.

यह कार्रवाई CBI द्वारा दर्ज एक एफआईआर के आधार पर की गई, जिसमें फर्जी निर्यात दिखाकर सरकारी खजाने से गलत तरीके से टैक्स रिफंड लेने की बात सामने आई है. इस मामले में शनिवार को पटना, पूर्णिया, जमशेदपुर, नालंदा और मुंगेर में सात स्थानों पर छापेमारी की गई, जहां से 100 ग्राम के सात सोने की ईंटें, कई आपत्तिजनक दस्तावेज और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं.

एफआईआर में आरोपी अधिकारियों में रणविजय कुमार (तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त, कस्टम्स पटना), तरुण कुमार सिन्हा, राजीव रंजन सिन्हा (दोनों तत्कालीन अधीक्षक, कस्टम्स, एलसीएस भीमनगर), नीरज कुमार और मनमोहन शर्मा (दोनों तत्कालीन अधीक्षक, कस्टम्स एलसीएस जयनगर, वर्तमान में असिस्टेंट कमिश्नर) और गंगा सिंह (जी-कार्ड धारक/निजी व्यक्ति) के नाम शामिल हैं.

फर्जी कंपनियों के जरिए टाइल्स और ऑटो पार्ट्स के निर्यात का दावा

CBI की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन अधिकारियों ने निजी लाभ के लिए 23 फर्जी आयातक कंपनियों, कुछ निर्यातकों और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर साजिश रची और टाइल्स तथा ऑटो पार्ट्स के फर्जी निर्यात को दर्शाया. यह निर्यात भीमनगर, जयनगर और भिट्ठामोड़ जैसे ज़िलों से दिखाया गया, ताकि जीएसटी कार्यालय से फर्जी रिफंड प्राप्त किया जा सके.

CBI का कहना है कि इन सभी आरोपियों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर जानबूझकर अपने सार्वजनिक कर्तव्यों का दुरुपयोग किया, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और निजी पक्षों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया.

आरोपी कंपनियों ने लगभग ₹100 करोड़ तक के झूठे रिफंड क्लेम किए और इसके बदले अधिकारियों को अनुचित लाभ देने की कोशिश की गई. CBI ने बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है और इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है.

यह मामला भ्रष्टाचार, सरकारी तंत्र के दुरुपयोग और संगठित वित्तीय अपराध का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है. CBI की कार्रवाई यह संदेश देती है कि फर्जी बिलों और टैक्स रिफंड घोटालों में लिप्त सरकारी अधिकारियों और निजी लाभार्थियों को अब सख्त जवाब देना होगा. जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

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-भारत एक्सप्रेस 



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