पश्चिम बंगाल के चर्चित नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अहम मोड़ आया है. मामले की सुनवाई कर रही पीठ के सदस्य जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने हितों के टकराव का हवाला देते हुए खुद को इस केस से अलग कर लिया है. अब शीर्ष अदालत इस मामले में 7 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेगी.
‘वकालत के दिनों में कुछ पक्षों का किया था प्रतिनिधित्व’
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने खुद को अलग करने की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि अपनी वकालत के दिनों में उन्होंने मिलन प्रधान से जुड़े इस मामले में कुछ पक्षों का प्रतिनिधित्व किया था, इसलिए वे इस याचिका की सुनवाई में शामिल नहीं हो सकते.
सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल पुलिस का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जल्द सुनवाई की मांग की थी. उन्होंने कोर्ट को बताया कि मिलन प्रधान IPC की धारा 302 (हत्या) के गंभीर मामले में आरोपी हैं और उन्हें केवल चुनाव लड़ने के लिए ही अंतरिम जमानत दी गई है.
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा था कि कोर्ट का बोर्ड पहले से काफी व्यस्त है, इसलिए मामले को सोमवार के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है.
कोलकाता हाई कोर्ट से मिली अंतरिम राहत
आपको बता दें कि कोलकाता हाई कोर्ट ने मिलन प्रधान को 21 अक्टूबर तक के लिए तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दी है. हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए राहत दी थी कि उम्मीदवार को नामांकन पत्र भरने के ठीक बाद हिरासत में लिया गया था, जबकि उनके खिलाफ दर्ज मामले 2007 के ऐतिहासिक नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े हैं.
हाई कोर्ट ने प्रधान को 10,000-10,000 रुपये के दो निजी मुचलकों पर सशर्त जमानत दी है. अदालत के आदेशानुसार, मिलन प्रधान को अपना मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस स्टेशन में जमा कराना होगा. जांच अधिकारी उनकी लोकेशन ट्रैक करने के लिए रोजाना सुबह 8:30 से 10:00 बजे और रात 9:30 से 10:30 बजे के बीच फोन करेंगे. बता दें कि मिलन प्रधान पर कुल 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 5 मामलों में वे जेल में बंद थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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