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‘पॉक्सो’ नाम अधिकतर ने सुना, कानून की सही जानकारी सिर्फ 17% को; समाधान अभियान के अध्ययन का खुलासा

समाधान अभियान के वार्षिक दिवस 2026 में जारी अध्ययन के अनुसार, अधिकांश लोग पॉक्सो शब्द से परिचित हैं, लेकिन केवल 17% लोगों को पॉक्सो अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की सही जानकारी है.

नई दिल्ली: बाल यौन शोषण की रोकथाम के लिए कार्यरत संस्था समाधान अभियान ने रविवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में आयोजित अपने वार्षिक दिवस 2026 पर पॉक्सो से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जारी किए. संस्था के अध्ययन में सामने आया है कि अधिकांश लोग ‘पॉक्सो’ शब्द से तो परिचित हैं, किंतु पॉक्सो अधिनियम के सही प्रावधानों की जानकारी मात्र 17% लोगों को ही है.

आंकड़े यह भी संकेत देते हैं कि बाल यौन शोषण की रोकथाम के लिए बच्चों से कहीं अधिक वयस्कों अभिभावकों, शिक्षकों और समुदाय को जागरूक करने की आवश्यकता है, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा की पहली ज़िम्मेदारी उन्हीं पर है.

संस्था की संस्थापिका एवं अध्यक्ष अर्चना अग्निहोत्री ने कहा कि जानकारी की यही कमी बच्चों की सुरक्षा में सबसे बड़ी बाधा है, और इसे दूर करने के लिए समुदाय स्तर पर निरंतर जागरूकता आवश्यक है. कार्यक्रम में डीसीपीसीआर अध्यक्ष ओम प्रकाश व्यास ने बाल संरक्षण और बाल अधिकारों से जुड़े प्रयासों की सराहना करते हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए निरंतर जागरूकता और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया.

इस अवसर पर लता गुप्ता, अध्यक्ष, दिल्ली महिला आयोग; शिखा राय, विधायक, ग्रेटर कैलाश; स्वाति गुप्ता एवं कुंदन कंसकार, सदस्य, डीसीपीसीआर; मेजर जनरल डॉ. अतुल बाजपेयी; सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे.

पॉक्सो पर विशेष प्रस्तुति

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण पॉक्सो से संबंधित आंकड़ों एवं जमीनी अनुभवों पर आधारित विशेष प्रस्तुति रही. इसमें बाल संरक्षण के प्रमुख मुद्दों, जमीनी स्तर की चुनौतियों तथा बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता को रेखांकित किया गया.

समाज के लिए काम करने वालों का सम्मान

  • • डॉ. संजय कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर — शिक्षा
    •सुधा कुमारी झा, समाज सेविका — पर्यावरण
    •  पिया जिंदल, हेल्थ टेक विज़नरी — स्वास्थ्य

सम्मानित प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए सामाजिक कार्यों की चुनौतियों और समुदाय की भूमिका पर विचार रखे.

ज़मीन पर बदलाव

  • • “चुप्पी तोड़; अब तो बोल”: इंडिया पेस्टीसाइड्स लिमिटेड के सहयोग से बाल यौन शोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उसकी रोकथाम के लिए संस्था का प्रमुख अभियान.
  • • 360° पुनर्वास सहायता: पीड़ित बच्चों को संरक्षण, सहायता और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की पहल, जिसके तहत उत्तर प्रदेश के विभिन्न पुलिस थानों में छह बाल-अनुकूल केंद्र स्थापित किए गए हैं.
  • • “अपशिष्ट श्रमिक कल्याण, समावेशन और जलवायु लचीलापन पहल” के लिए संस्था की हरियाणा टीम को Climate Solutions Lab में चयनित किया गया है. यह पहल हरियाणा के अनौपचारिक कचरा श्रमिकों, विशेषकर महिला श्रमिकों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है.

कार्यक्रम के समापन पर शीलम बाजपेयी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने सभी अतिथियों, सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ताओं, सहयोगियों और कोर टीम के प्रति आभार व्यक्त किया तथा सामाजिक सरोकारों को आगे बढ़ाने में सामूहिक सहयोग के महत्व को रेखांकित किया.

समाधान अभियान के बारे में

समाधान अभियान 2015 में स्थापित एक पंजीकृत गैर-सरकारी संस्था है, जो बाल सुरक्षा, बाल यौन शोषण की रोकथाम और पॉक्सो अधिनियम के प्रति बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और समुदायों में जागरूकता के लिए कार्य करती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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