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चंद्रबाबू नायडू का महा-खुलासा! फिर आ रहा है परिसीमन बिल, बंगाल में बदले समीकरणों के बीच अब पास करा लेंगे मोदी?

एनडीए के प्रमुख सहयोगी चंद्रबाबू नायडू ने संकेत दिया है कि केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को दोबारा संसद में ला सकती है. विपक्ष पहले ही इस मुद्दे पर मुखर है और सीटों के पुनर्वितरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है…

भारतीय राजनीति के गलियारों से इस समय की सबसे बड़ी और महा-सनसनीखेज सियासी खबर (Chandrababu Naidu on Delimitation Bill) सामने आ रही है. लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर सीधे 850 करने वाले और महिलाओं को आरक्षण देने वाले ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026’ को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. दरअसल भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के सबसे अहम और सबसे बड़े सहयोगी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में दिए एक खास इंटरव्यू में साफ कन्फर्म कर दिया है कि मोदी सरकार बहुत जल्द संसद में दोबारा परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पेश करने जा रही है. एनडीए कैंप की तरफ से यह पहला आधिकारिक बयान है, जिसने विपक्ष के खेमे में भारी हड़कंप मचा दिया है.

नायडू ने परसीमान बिल पर क्या कहा?(Chandrababu Naidu on Delimitation Bill)

बता दें कि एनडीए सरकार को अपने 16 सांसदों का सबसे मजबूत लाइफ-सपोर्ट देने वाली तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के मुखिया चंद्रबाबू नायडू ने इंटरव्यू में खुलकर कहा कि NDA सरकार जल्द ही परिसीमन विधेयक लाएगी और महिलाओं के लिए रिजर्वेशन लागू करेगी.

अगर हम राजनीति में महिलाओं को आगे लाना चाहते हैं तो यह समय की मांग है, और इसे मेरा पूरा समर्थन है. नायडू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्यों में सीटों की 50% प्रोपोर्शनल (आनुपातिक) बढ़ोतरी पर सरकार का इरादा शुरू से साफ था, बिल के टेक्स्ट से सिर्फ एक चूक हुई थी जिसे विपक्ष ने बेवजह बड़ा मुद्दा बना दिया.

बदल गया संसद का पूरा गणित

गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल 2026 में सरकार ने पार्लियामेंट का स्पेशल सेशन बुलाकर इस बिल को पेश किया था, जो 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों को बढ़ा रहा था. लेकिन, जरूरी दो-तिहाई बहुमत (360 वोट) न होने के कारण सरकार यह बिल 54 वोटों से हार गई थी. लेकिन अब संसद के भीतर की तस्वीरें पूरी तरह बदल चुकी हैं:

TMC में महा-बगावत: तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि ममता बनर्जी के 29 सांसदों में से करीब 20 बागी सांसद उनके साथ हैं, जिन्होंने लोकसभा स्पीकर से अलग बैठने की मांग की है. अगर ये 20 सांसद एनडीए के पाले में आते हैं, तो एनडीए का बेस 293 से बढ़कर सीधे 313 हो जाएगा.

DMK का एग्जिट: स्टालिन की DMK ने ‘INDIA’ गठबंधन छोड़ दिया है, हालांकि वह राज्यों के अधिकारों की दुहाई देकर अब भी परिसीमन के मौजूदा स्वरूप का ‘सिद्धांत रूप’ में विरोध कर रही है.

शिवसेना (UBT) का स्टैंड: उद्धव गुट के 9 सांसदों में से 6 के टूटने की अटकलें थीं, लेकिन जमीनी हकीकत में वे अब भी एनडीए से कोसों दूर हैं.

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जादुई आंकड़े से अभी भी 12 कदम दूर है NDA?

अगर इस (Chandrababu Naidu on Delimitation Bill) पूरे नए नंबर गेम को समझें, तो एनडीए के मूल 293 और टीएमसी के 20 बागियों को मिलाकर आंकड़ा 313 पहुंचता है. इसमें अप्रैल में एनडीए का साथ देने वाले 5 अन्य सांसदों को भी जोड़ दिया जाए, तो सरकार अधिकतम 348 सांसदों के समर्थन तक पहुंच पा रही है.

यानी, दोबारा बिल पास कराने और संविधान संशोधन के लिए जरूरी 360 के जादुई आंकड़े से मोदी सरकार अभी भी करीब 12 वोट दूर है. ऐसे में देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या आगामी सत्र में कुछ और विपक्षी दलों में सेंध लगाकर पीएम मोदी इस ऐतिहासिक बिल को पास करा पाते हैं या नहीं!

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-भारत एक्सप्रेस



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