UP News: बलिया के सिकंदरपुर इलाके के एक प्राथमिक विद्यालय से गुरु-शिष्य संबंध को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है. स्कूल के हेडमास्टर पर दो नन्हीं छात्राओं से गलत हरकत करने का आरोप लगा है. गुरुवार को पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लिया.
छात्राओं का आरोप
नवानगर शिक्षा क्षेत्र के इस विद्यालय में कक्षा दो में पढ़ने वाली सात और पांच साल की बच्चियों के परिजनों ने बताया कि हेडमास्टर ने चॉकलेट का लालच देकर उन्हें बाथरूम में ले जाकर अश्लील हरकत की. बच्चियों ने घर लौटने पर परिजनों को पूरी घटना बताई.
परिजनों की कार्रवाई
परिजन आरोपी के स्कूल आने का इंतजार कर रहे थे क्योंकि वह तीन दिन तक जनगणना प्रशिक्षण में व्यस्त था. जैसे ही गुरुवार को वह विद्यालय पहुंचा, ग्रामीणों और परिजनों ने उसे पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी. डायल 112 पर खबर देने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को थाने ले गई.
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कानूनी कदम
सात साल की बच्ची के नाना की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी प्रधानाध्यापक फैजुल्ला के खिलाफ छेड़खानी और पाक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया. फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और घटना की जांच-पड़ताल जारी है.
यह घटना शिक्षा जगत के लिए शर्मनाक है. जिस शिक्षक पर बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की जिम्मेदारी होती है, उसी पर गंभीर आरोप लगे हैं. पुलिस की कार्रवाई से ग्रामीणों और परिजनों को राहत मिली है लेकिन इस मामले ने समाज को झकझोर कर रख दिया है.
क्या है पॉक्सो एक्ट?
पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) यानी Protection of Children from Sexual Offences Act वर्ष 2012 में लागू किया गया था. इसका उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण, छेड़छाड़ और अश्लील गतिविधियों से कानूनी सुरक्षा देना है. इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के खिलाफ किसी भी प्रकार के यौन अपराध को गंभीर अपराध माना जाता है और इसके लिए सख्त सज़ा का प्रावधान है. इसमें विशेष अदालतों की व्यवस्था की गई है ताकि मामलों का निपटारा तेजी से हो सके. पॉक्सो एक्ट बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए भारत का एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम है.
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-भारत एक्सप्रेस
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