Chandrapur Child Swallows Magnet: चंद्रपुर/अभिषेक: बच्चों को खिलौने देते समय माता-पिता का सतर्क रहना कितना जरूरी है, यह महाराष्ट्र के चंद्रपुर की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना से साबित हो गया है. यहां 6 साल के एक बच्चे ने खेलते समय गलती से चुंबक निगल लिया. मामला तब और गंभीर हो गया जब सर्जरी के लिए बच्चे को एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) देना नामुमकिन था. ऐसे में आधुनिक मेडिकल साइंस की तकनीक ‘बिना सर्जरी वाले टेलिस्कोप’ (एंडोस्कोपी) ने बच्चे की जान बचाकर एक नई मिसाल पेश की है.
लापरवाही पड़ सकती है भारी (Chandrapur Endoscopy procedure)
चंद्रपुर का रहने वाला यह 6 वर्षीय बच्चा घर पर अकेले चुंबक से खेल रहा था. उस वक्त उसके माता-पिता आस-पास नहीं थे. खेलते-खेलते मासूम ने चुंबक मुंह में डाल लिया और वह सीधे पेट में चला गया. घबराहट में जब बच्चे ने रोते हुए माता-पिता को बताया कि पेट में कुछ चला गया है, तब परिजनों के होश उड़ गए. वे बिना देरी किए बच्चे को लेकर चंद्रपुर के जाने-माने गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और एंडोस्कोपी स्पेशलिस्ट डॉ. राहुल सैनानी के पास पहुंचे.
डॉक्टरों के सामने थी बड़ी चुनौती
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों के सामने एक बड़ी तकनीकी चुनौती खड़ी हो गई. दरअसल, घटना से कुछ ही देर पहले बच्चे ने खाना खाया था. मेडिकल साइंस के अनुसार, भरे पेट में मरीज को एनेस्थीसिया (बेहोश करना) देना बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि इससे उल्टी होकर खाना फेफड़ों में जाने का रिस्क रहता है. बच्चे की गंभीर हालत और संभावित खतरे को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत फैसला लिया कि वे बिना चीर-फाड़ और बिना बेहोश किए ही इस चुंबक को बाहर निकालेंगे.
बिना सर्जरी 2 मिनट में कमाल (Non-surgical telescope In Chandrapur)
डॉ. राहुल सैनानी ने समय बर्बाद किए बिना ‘एंडोस्कोपी’ तकनीक का इस्तेमाल किया. इसे मेडिकल भाषा में बिना सर्जरी वाला टेलिस्कोप भी कहा जा सकता है. इस प्रक्रिया में एक पतली, लचीली ट्यूब (जिसके सिरे पर एक छोटा सा कैमरा और लाइट लगी होती है) को मरीज के मुंह के रास्ते पेट में डाला जाता है. बाहर स्क्रीन पर डॉक्टर अंदर की स्थिति देखते हैं.
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इस खास टेलिस्कोप की मदद से डॉक्टरों ने चुंबक की सटीक लोकेशन का पता लगाया और विशेष उपकरणों के जरिए सिर्फ 2 मिनट के अंदर चुंबक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. इस आधुनिक तकनीक के कारण बच्चे को न तो किसी चीरे (Incision) के दर्द से गुजरना पड़ा और न ही कोई बड़ी सर्जरी करनी पड़ी.
हेल्थ और सेफ्टी अलर्ट
मेडिकल एक्सपर्ट्स इस घटना को माता-पिता के लिए एक बड़ा ‘वेक-अप कॉल’ मान रहे हैं. बच्चों के मामले में इन बातों का विशेष ध्यान रखें. छोटे बच्चों को कभी भी छोटे चुंबक, सिक्के, बटन बैटरी या ऐसे खिलौने न दें जिन्हें आसानी से निगला जा सके. (बैटरी या कई चुंबक एक साथ निगलना जानलेवा हो सकता है, क्योंकि ये आंतों को फाड़ सकते हैं. जब भी बच्चे खेल रहे हों, तो घर के किसी बड़े सदस्य का आस-पास होना जरूरी है. अगर बच्चा गलती से कुछ निगल ले, तो घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर (गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या बाल रोग विशेषज्ञ) के पास जाएं.
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