जस्टिस बीआर गवई.
CJI BR Gavai Speech: शनिवार को नालसार विधि विश्वविद्यालय, हैदराबाद (Nalsar Law University) का 22वां दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ. इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई (CJI BR Gavai) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इसके साथ ही तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और सुप्रीम कोर्ट के साथ ही हाईकोर्ट के न्यायाधीश कार्यक्रम में शामिल हुए. इस दौरान सीजेआई बीआर गवई (CJI BR Gavai) ने छात्रों, अतिथियों और विश्वविद्यालय को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कई हमन विषयों पर अपनी राय रखी. उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत 22वें दीक्षांत समारोह में खुद को आमंत्रित करने के लिए आभार के साथ किया. इसके बाद उन्होंने कहा कि मुझे मुझे यथार्थवाद और व्यावहारिकता के साथ कुछ विचार साझा करने दें.
कानूनी पेशा आसान नहीं है. इस पेशे का कोई सीधा रास्ता नहीं है. इसमें कोई गारंटीकृत रिटर्न नहीं है. यह पेशा आपसे लगातार खुद को साबित करने की मांग करता है. छात्रों से उन्होंने कहा कि आपको लगातार मापा जाएगा, न केवल न्यायाधीशों और मुवक्किलों द्वारा, बल्कि अक्सर आपकी अपनी अंतरआत्मा भी आप पर सवाल उठाएंगी. इसके बाद भी आप बढ़ते रहेंगे. क्योंकि, कानून आपकी दृढ़ता, आपका विश्वास मांगता है.
कैसा होना चाहिए एक बैरिस्टर?
साल 2024 में आई थॉमस ग्रांट की किताब ‘द मंडेला ब्रीफ’ जिक्र करते हुए न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि यह पुस्तक सिडनी केंट्रिज द्वारा दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लड़े गए मामलों से संबंधित है. इससे साफ होगा कि एक बैरिस्टर के रूप में जीवन कठिन होता है. इसके लिए निरंतर आवेदन और एकाग्रता की आवश्यकता होती है. तनाव, चिंता, यहां तक कि भय के क्षण भी आते हैं. इसमें शाम और सप्ताहांत का त्याग शामिल होता है.
उन्होंने कहा एक अधिवक्ता होने के लिए न केवल सहनशक्ति बल्कि फुर्ती की भी आवश्यकता होती है. मामले में हर प्रासंगिक तथ्य आपके दिमाग में सबसे आगे होना चाहिए. हर दस्तावेज आपकी उंगलियों पर होना चाहिए. CJI ने कहा कि कई बार लोग अपने संघर्ष को किसी के सामने नहीं लाते हैं. उसे छुपाने की कोशिश करते हैं लेकिन आपको ऐसा नहीं करना है. क्योंकि, आपको अपने पेशे में अपने मानसिक सेहत का ध्यान रखना जरूरी है.
‘कानून जानने का कोई शॉर्टकट नहीं’
याद रखें: कानून जानने का कोई शॉर्टकट नहीं है. मूल बातों को अच्छी तरह से जानने का कोई विकल्प नहीं है. संविधान, अनुबंध अधिनियम, नागरिक प्रक्रिया संहिता, आपराधिक कानून और अन्य मुख्य विषय वैकल्पिक विषय नहीं हैं. वे आपकी दैनिक रोटी हैं। वे ही आपको स्पष्टता से बहस करने, आत्मविश्वास से सलाह देने, दृढ़ विश्वास के साथ पढ़ाने और ईमानदारी से सेवा करने की अनुमति देते हैं.
कानून तेजी से बदल रहा है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा गोपनीयता जैसे नए उभरते क्षेत्र शामिल हैं. बेशक, इन नवीनतम विकासों से अवगत रहें लेकिन अपनी नींव मजबूत रखें। क्योंकि कानूनी पेशे में, सबसे मजबूत दिमाग वे नहीं होते जो हर प्रवृत्ति का पीछा करते हैं, बल्कि वे होते हैं जो कानून स्कूल के वर्षों बाद भी एक मूलभूत अवधारणा को स्पष्टता, सटीकता और अंतर्दृष्टि के साथ समझा सकते हैं.
मेंटरशिप क्यों है जरूरी?
एक बात और जो ध्यान में रखनी है वह है मेंटरशिप. दूसरों के अनुभव से सीखना, जो आपसे पहले इस पेशे में है. कानून के पेशे में मेंटरशिप एक गेम-चेंजर हो सकती है. सब कुछ किताबों या निर्णयों में नहीं मिल सकता. कुछ सबक बातचीत में, प्रोत्साहन में, पहले मसौदे में मिल जाते हैं. मैं ईमानदारी से कहता हूं: मैं आज यहां सिर्फ इसलिए नहीं हूं क्योंकि मैंने कड़ी मेहनत की है. मैं यहां इस लिए भी हूं क्योंकि किसी ने मेरे लिए एक दरवाजा खोला. किसी ने मुझमें कुछ ऐसा देखा जो मैं खुद में नहीं देख पाया था. विश्वास, समर्थन और ज्ञान साझा करने के उस कार्य ने मेरा जीवन बदल दिया. इसलिए, मैं इस कमरे में मौजूद सभी वरिष्ठों- वकीलों, न्यायाधीशों, प्रोफेसरों, पेशेवरों से अपील करता हूं कि वह मेंटरशिप दें. क्योंकि, मेंटरशिप कोई एहसान नहीं है यह एक जिम्मेदारी है.
विदेश जाना कितना जरूरी?
आगे उन्होंने एक संवेदनशील विषय पर बात करते हुए कहा कि विदेश में मास्टर डिग्री हासिल करने का दबाव ब्रांड का प्रतीक ब गया है. यदि आप जाना चाहते हैं तो जाएं. इससे आपको विकास होगा. आपको यह जानने को मिलेगा की दुनिया कैसे सोचती है और वहां काम कैसे होता है. लेकिन छात्रवृत्ति और फंडिंग के साथ जाएं. किसी उद्देश्य के साथ जाएं. विदेशी डिग्री के दबाव में न जाएं. उन्होंने कहा कि मैं देखता हूं युवा 50 से 70 लाख रुपये का कर्ज लेते हैं. सिर्फ एक विदेशी डिग्री के लिए खुद को या अपने परिवार को कर्ज के बोझ तले डाल देते हैं. ऐसे फैसले आपको जल्दबाजी में या साथियों के दबाव में नहीं लेना चाहिए.
50-70 लाख रुपये एक बड़ी राशि है. इसका एक छोटा सा हिस्सा आपके अभ्यास शुरू करने या एक चैंबर बनाने के लिए निवेश के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. बाद में, जब आप स्थिर हो जाएं, तो पढ़ाई के लिए विदेश जाएं. सीखने की कोई उम्र सीमा नहीं है. विदेश भागने के लिए नहीं, बल्कि विस्तार करने के लिए जाएं. अपने काम से इतना प्यार करें कि आप उसे ब्रांड करने से पहले उसे बनाएं. यह एक सवाल भी है कि आखिर इतने लोग अपने शोध के लिए एक सार्थक मंच खोजने के लिए समुद्र पार करके क्यों जाते हैं.
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5 चीजों का रखें ध्यान
अपने भाषण के अंत में सीजेआई बीआर गवई (CJI BR Gavai) ने कहा कि आपको अपनी अंतिम सलाह देना चाहता हूं, मुख्य अतिथि के रूप में नहीं, बल्कि एक संरक्षक के रूप में. जीवन में पांच चीजों को कभी अनदेखा न करें. वो हैं दोस्त और परिवार, किताबें, शौक, स्वास्थ्य और कल्पना.
- दोस्त और परिवार आपके लंगर हैं. वे सबसे बुरे समय में भी आपका साथ देते हैं. वो भी बिना कुछ मांगे.
- किताबें सिर्फ ज्ञान के स्रोत नहीं हैं. वे दर्पण और खिड़कियां हैं. वे आपको सोचना और विनम्र रहना सिखाती हैं.
- स्वास्थ्य आपके सचेत बनाता है. इसके बारे में पढ़ें और पेशेवरों से बात करें. इसे गंभीरता से लें.
- कानून में कल्पना के लिए भी जगह है. यह कोई शिल्प नहीं है. यह विचारों, भावनाओं और आशा का एक जीवंत रूप है.
- अपने सपनों को दबाएं नहीं लेकिन उन्हें पूरा करने की कोशिश करें. अगर आप इसे दबाते हैं तो आप परेशान हो सकते हैं.
जीवन में आराम भी जरूरी
अंत में सीजेआई बीआर गवई (CJI BR Gavai) ने कहा कि जब अपका मन भारी लगने लगे तो टाइम लाइन का निर्धारण करें. लोग अपने स्वभाव को दबाकर जीते हैं. कभी-कभी जीवन में विराम लेना ठीक है. अनिश्चित होना ठीक है. आपको हमेशा खुद को साबित करने की आवश्यकता नहीं है. कभी-कभी, बस होना ही काफी है. इन शब्दों के साथ, मैं अपना संबोधन समाप्त करता हूं.
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