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कॉकरोचों के प्रदर्शन में घुसी ‘डफली गैंग’! जंतर-मंतर पर कम्युनिस्ट छात्रों का भारी बवाल, लगे आजादी के नारे

CJP Protest on jantar mantar: जंतर-मंतर पर आयोजित CJP के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए. शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा घोटालों को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान वामपंथी संगठनों की मौजूदगी और नारों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया.

Cockroach Janata Party

CJP Protest on jantar mantar

CJP Protest on jantar mantar: लगभग 20 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत द्वारा की गई टिप्पणी के बाद एक डिजिटल जन आंदोलन शुरू हुआ, जिसका नाम पड़ा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’. इस पार्टी ने चार से पांच दिनों के भीतर 2 करोड़ (20 मिलियन) फॉलोअर्स का डिजिटल समर्थन जुटा लिया. हालांकि, इसके बाद कई सवाल खड़े हुए कि यह सिर्फ इंस्टाग्राम पर दिखने वाला बूम है और यह कोई वास्तविक जनसमर्थन नहीं जुटा पाएगा. लेकिन सारे कयास तब धराशायी हो गए, जब आज (6 जून) दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर हजारों की संख्या में युवा इस जन आंदोलन के समर्थन में जुटे.

बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके (CJP founder Abhijeet Dipke) ने 1 जून को अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर जानकारी दी थी कि वह आज यानी शनिवार को भारत लौटेंगे. इसी के साथ उन्होंने बताया था कि देश में चल रहे परीक्षा घोटालों के खिलाफ 6 जून को जंतर-मंतर पर एक व्यापक प्रदर्शन होगा.

प्रदर्शन में क्या-क्या हुआ

सीजीपी के प्रदर्शन (CJP Protest) में बड़ी संख्या में स्कूल-कॉलेज के छात्र और युवा पेशेवर शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए जोरदार नारेबाजी की. इस दौरान सीजीपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह लड़ाई लंबी है और पिछले एक महीने से सोशल मीडिया पर लगातार इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कार्रवाई करने के बजाय विरोध की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है. दीपके ने कहा कि पोस्ट हटाई जा सकती हैं, लेकिन छात्रों और युवाओं की आवाज को खत्म नहीं किया जा सकता.

वामपंथी लगा रहे आजादी के नारे

सीजीपी के प्रदर्शन के दौरान एक और दिलचस्प नजारा देखने को मिला. आंदोलन में कई वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्य भी शामिल हुए. प्रदर्शन के दौरान वे हाथों में डफली लेकर नारेबाजी करते नजर आए. खास तौर पर “आजादी” से जुड़े नारों ने लोगों का ध्यान खींचा. इस दौरान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. प्रदर्शन में वामपंथी संगठनों की मौजूदगी ने इस आंदोलन को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज कर दी है.

मुख्य न्यायाधीश ने क्या कहा था?

यह आंदोलन 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद शुरू हुआ था. जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से कर दी थी. जिसके बाद उनके बयान को कई युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपमानजनक बताया, जिसके विरोध में सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक अभियान शुरू किया गया.


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कुछ ही दिनों में यह अभियान लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया. बड़ी संख्या में युवाओं ने इसका समर्थन किया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इससे जुड़े कंटेंट को साझा किया. देखते ही देखते इसके इंस्टाग्राम पेज ने करोड़ों लोगों तक पहुंच बना ली और यह एक बड़े ऑनलाइन आंदोलन का रूप ले गया.

-भारत एक्सप्रेस



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