सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मालेगांव फैसले पर दी प्रतिक्रिया.
मालेगांव बम ब्लास्ट मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने फैसला सुनाते हुए सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है. कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सभी सातों आरोपियों को बरी किया है. अदालत के आए फैसले के बाद महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र (CM Fadnavis) फडणवीस ने कहा कि आतंकवाद भगवा न कभी था और ना ही कभी रहेगा.
CM Fadnavis ने एक्स पर शेयर किया पोस्ट
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (CM Fadnavis) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसमें उन्होंने लिखा- आतंकवाद भगवा न कभी था, ना है, ना कभी रहेगा!
आतंकवाद भगवा न कभी था, ना है, ना कभी रहेगा!#MalegaonVerdict
— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) July 31, 2025
कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि एटीएस और एनआईए की चार्जशीट में काफी अंतर है. अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि बम मोटरसाइकिल में था. प्रसाद पुरोहित के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला कि उन्होंने बम बनाया या उसे सप्लाई किया. यह भी साबित नहीं हुआ कि बम किसने लगाया. घटना के बाद विशेषज्ञों ने सबूत इकट्ठा नहीं किए, जिससे सबूतों में गड़बड़ी हुई.
कोर्ट ने यह भी कहा कि धमाके के बाद पंचनामा ठीक से नहीं किया गया, घटनास्थल से फिंगरप्रिंट नहीं लिए गए और बाइक का चेसिस नंबर कभी रिकवर नहीं हुआ. साथ ही, वह बाइक साध्वी प्रज्ञा के नाम से थी, यह भी सिद्ध नहीं हो पाया.
बता दें कि इस मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से सुनवाई और अंतिम दलीलें पूरी करने के बाद 19 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रखा गया था. इस मामले में सात लोग, जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय शामिल हैं, जिन पर मुकदमा चल रहा है. इन सभी लोगों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं. सभी आरोपी वर्तमान में जमानत पर रिहा हैं.
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29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में रमजान के पवित्र महीने में और नवरात्रि से ठीक पहले एक विस्फोट हुआ. इस धमाके में छह लोगों की जान चली गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए. एक दशक तक चले मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 323 गवाहों से पूछताछ की, जिनमें से 34 अपने बयान से पलट गए. शुरुआत में, इस मामले की जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने की थी. हालांकि, 2011 में एनआईए को जांच सौंप दी गई.
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-भारत एक्सप्रेस
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