Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

कांग्रेस का होगा पुनर्जन्म! क्या CJP प्रोटेस्ट साबित होगा विपक्ष के लिए संजीवनी? समझिए 2027 और 2029 का पूरा गणित

लगातार मिलती चुनावी हार के बीच क्या CJP का छात्र आंदोलन कांग्रेस के लिए संजीवनी बनेगा? नीट पेपर लीक के बहाने विपक्ष 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए केंद्र सरकार की रणनीतिक घेराबंदी में जुट गया है. जानिए इस आंदोलन का पूरा सियासी गणित.

congress-cjp-protest-neet-leak-politics-2027-2029-election-math

AI IMAGE

लगातार मिलती चुनावी हार, अंदरूनी खींचतान और धीरे-धीरे खिसकता जनाधार… पिछले कुछ सालों से कांग्रेस जिस राजनीतिक अकाल से गुजर रही थी, क्या अब उसे उस बंजर जमीन पर हरियाली का रास्ता मिल गया है? नीट (NEET) पेपर लीक-2026 के खिलाफ सड़कों पर उतरा युवाओं का गुस्सा और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का लगातार जारी प्रदर्शन क्या वाकई कांग्रेस के ‘पुनर्जन्म’ का जरिया बन रहा है? 2027 के उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के विधानसभा चुनाव हों या फिर 2029 का दिल्ली का तख्त, बैकफुट पर फंसा विपक्ष अचानक कैसे फ्रंटफुट पर आकर आक्रामक बैटिंग करने लगा है? आइए समझते हैं इस पूरे छात्र आंदोलन के पीछे छिपा असली पॉलिटिकल चक्रव्यूह.

संसद से सड़क तक सरकार की घेराबंदी

राहुल गांधी की अगुवाई में पूरा विपक्ष नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को चारों तरफ से घेरने में जुटा है. जंतर-मंतर पर हुए बड़े प्रदर्शनों और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी गलियारों की हवा बदलती दिख रही है. संसद के अंदर और बाहर, विपक्ष लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है. लेकिन ध्यान से देखें तो कहानी सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है.

पर्दे के पीछे असली रणनीति 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है. कांग्रेस बीजेपी को लगातार ऐसे संवेदनशील मुद्दों में उलझाए रखना चाहती है ताकि उसकी चुनावी मशीनरी को बैकफुट पर रखा जा सके.

विपक्ष का ‘मास्टरस्ट्रोक’

नीट मामले में सड़कों पर उतरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आंदोलन ने विपक्ष को वह जमीन दे दी है, जिसकी उसे लंबे समय से तलाश थी. दरअसल, विपक्ष अब तक सरकार के खिलाफ जितने भी प्रदर्शन कर रहा था, वे ‘जेन जी’ (Gen Z) युवाओं से सीधे कनेक्ट नहीं हो पा रहे थे. लेकिन इस बार जब युवाओं का गुस्सा खुद-ब-खुद सड़कों पर उबला, तो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया.

राहुल गांधी और अखिलेश यादव खुद प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े नजर आए, तो वहीं ममता बनर्जी भी इंडिया ब्लॉक को एकजुट रखकर केंद्र पर लगातार हमलावर हैं.

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके का कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के आवास पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि पर्दे के पीछे से यह आंदोलन अब एक बड़ी राजनीतिक घेराबंदी का रूप ले चुका है.

क्या है विपक्ष की रणनीतियां?

विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए 5 प्रमुख मोर्चों पर काम शुरू किया है. युवाओं से जुड़े पेपर लीक और बेरोजगारी, चीन-बांग्लादेश से जुड़ी विदेश नीति, ग्रेट निकोबार जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर सवाल, महंगाई और E-20 ईंधन से गाड़ियों में आ रही तकनीकी खामियां.

इस बीच, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा किसी मेहरबानी का नतीजा नहीं, बल्कि युवाओं के संघर्ष की जीत है. वहीं आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने नीट प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस ज्यादती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

राजनीति में समय और माहौल सबसे बड़े हथियार होते हैं. युवाओं का असंतोष, विपक्षी दलों की एकजुटता और रणनीतिक घेराबंदी ने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2029 के आम चुनाव की पिच तैयार कर दी है. अब देखना यह होगा कि क्या विपक्ष इस छात्र आंदोलन की तपिश को वोटों की फसल में बदल पाता है या नहीं.

ये भी पढ़ें: ‘यह बिहार है बाबू, यहां सब संभव है’ ताला तोड़ने का टाइम नहीं था तो उखाड़ ले गए ATM; खेत में बैठकर साफ किए ₹40 लाख… देखें VIDEO

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital