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श्रीहरिकोटा में तीसरे लॉन्च पैड के निर्माण को मिली मंजूरी, भारत के अंतरिक्ष मिशनों को मिलेगा नया आयाम

इसरो ने श्रीहरिकोटा में तीसरे लॉन्च पैड के निर्माण को मंजूरी दे दी है, जिसकी लागत लगभग 3,984.8 करोड़ रुपये होगी. यह परियोजना भारत की अंतरिक्ष लॉन्च क्षमताओं को बढ़ाएगी और भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों का समर्थन करेगी.

ISRO EOS 08 Satellite Launch

अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-8 (EOS-08) लॉन्च

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गुरुवार को घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय कैबिनेट ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में तीसरे लॉन्च पैड (TLP) के निर्माण को मंजूरी दे दी है. इस परियोजना की लागत करीब 3,984.8 करोड़ रुपये आंकी गई है. यह लॉन्च पैड भारत की अंतरिक्ष लॉन्च क्षमताओं को बढ़ाएगा और भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों का समर्थन करेगा.

यह लॉन्च पैड नई पीढ़ी के लॉन्च वाहनों (NGLV) और एलवीएम-3 वाहनों के साथ सेमिक्रायोजेनिक स्टेज को भी संभालने में सक्षम होगा. इसे अत्याधुनिक तकनीक और बहुउद्देशीय डिजाईन के साथ तैयार किया जाएगा.

अंतरिक्ष लक्ष्यों की दिशा में बड़ा कदम

इसरो का यह कदम भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष लक्ष्यों की दिशा में बड़ा कदम है. इनमें 2035 तक अपना खुद का स्पेस स्टेशन स्थापित करना और 2040 तक मानवयुक्त चंद्रमा मिशन शामिल हैं.

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया, “टीएलपी को अधिकतम औद्योगिक भागीदारी के साथ विकसित किया जाएगा. इसरो अपने पिछले लॉन्च पैड निर्माण अनुभव का पूरा लाभ उठाएगा.” इस परियोजना को 48 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

तीसरे लॉन्च पैड की आवश्यकता क्यों?

इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस सोमनाथ ने TOI को दिए एक इंटरव्यू में बताया था, “अभी हमारे पास केवल दूसरा लॉन्च पैड है. पहला लॉन्च पैड पीएसएलवी के लिए बनाया गया था, लेकिन यह जीएसएलवी के लिए उपयोगी नहीं है क्योंकि वह क्रायोजेनिक स्टेज संभाल नहीं सकता.”

उन्होंने यह भी कहा, “एलवीएम-3 के आने पर हमने दूसरे लॉन्च पैड को फिर से डिजाइन किया. अब एलवीएम-3 में सेमी-क्रायो स्टेज भी होगा और मानव अंतरिक्ष उड़ान की शुरुआत भी यहीं से होगी. लेकिन अगर किसी कारणवश दूसरा लॉन्च पैड काम न करे, तो कोई अन्य विकल्प नहीं रहेगा. इससे सभी कार्यक्रम रुक सकते हैं.”


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सोमनाथ ने बताया कि तीसरा लॉन्च पैड केवल बैकअप के तौर पर नहीं, बल्कि नई तकनीक और डिज़ाइन के साथ बनाया जाएगा. एनजीएलवी के लिए इसे क्षैतिज रूप से एकीकृत और झुकाव आधारित लॉन्च के लिए डिजाइन किया जाएगा. इसके लिए जेट डिफ्लेक्टर का नया डिजाईन तैयार होगा. इसके अलावा, स्टेज टेस्टिंग भी यहीं की जाएगी, जो पहले महेंद्रगिरि में होती थी.

-भारत एक्सप्रेस



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