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मालेगांव बम विस्फोट मामला, 17 साल बाद गुरुवार को NIA कोर्ट सुनाएगी फैसला

17 साल के इंतजार के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत गुरुवार को 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में अपना फैसला सुनाएगी.

मालेगांव बम विस्फोट मामला, 17 साल बाद गुरुवार को NIA कोर्ट सुनाएगी फैसला- भारत एक्सप्रेस

2008 मालेगांव ब्लास्ट (Malegaon blast 2008) मामले में आज NIA कोर्ट (Special NIA Court) का फैसला (verdict) आएगा; इस मालेगांव ब्लास्ट केस (Malegaon blast case) में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर (Sadhvi Pragya Thakur) और कर्नल पुरोहित (Colonel Purohit) समेत सभी आरोपियों (accused) की किस्मत का फैसला होगा, जिसे लेकर सबकी निगाहें कोर्ट (court) पर टिकी हैं।

(साभार IANS न्यूज एजेंसी)17 साल के इंतजार के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत गुरुवार को 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में अपना फैसला सुनाएगी. अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से सुनवाई और अंतिम दलीलें पूरी करने के बाद 19 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

कोर्ट ने क्या कहा था ?

कोर्ट ने कहा कि अप्रैल में सुनवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन मामले में एक लाख से अधिक पन्नों के सबूत और दस्तावेज होने के कारण, फैसला सुनाने से पहले सभी रिकॉर्ड की जांच के लिए अतिरिक्त समय चाहिए.

सभी आरोपियों को कोर्ट में रहने का आदेश

सभी आरोपियों को फैसले के दिन कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश दिया गया है. कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि जो आरोपी उस दिन अनुपस्थित रहेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

मामले में कितने लोगों पर मुकदमा

इस मामले में सात लोग, जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित (Prasad Purohit), पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर (Pragya Singh Thakur) और रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय (Ramesh Upadhyay) शामिल हैं, जिन पर मुकदमा चल रहा है. इन सभी लोगों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। सभी आरोपी वर्तमान में जमानत पर रिहा हैं.

क्या है मामला ?

29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में रमजान के पवित्र महीने में और नवरात्रि से ठीक पहले एक विस्फोट हुआ. इस धमाके में छह लोगों की जान चली गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए.

एक दशक तक चला मुकदमा

एक दशक तक चले मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 323 गवाहों से पूछताछ की, जिनमें से 34 अपने बयान से पलट गए. शुरुआत में, इस मामले की जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने की थी. हालांकि, 2011 में एनआईए (NIA) को जांच सौंप दी गई थी.

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2016 में कई आरोपी बरी

2016 में एनआईए (NIA) ने अपर्याप्त सबूतों का हवाला देते हुए प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कई अन्य आरोपियों को बरी करते हुए एक आरोप पत्र दाखिल किया था. घटना के लगभग 17 साल बाद आए इस फैसले का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है और इसके महत्वपूर्ण कानूनी और राजनीतिक परिणाम होने की संभावना है.

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-भारत एक्सप्रेस



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