Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

दिल्ली कोर्ट ने नरेश बलियान के मकोका मामले की जांच के लिए 60 दिन का अतिरिक्त समय दिया

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने मकोका मामले में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व विधायक नरेश बलियान की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को 60 दिन का अतिरिक्त समय दिया. बलियान के वकील ने फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने का संकेत दिया.

नरेश बालियान
Aarika Singh Edited by Aarika Singh

मकोका मामले में तिहाड़ जेल में बंद आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक नरेश बलियान के मामले की जांच के लिए राऊज एवेन्यु कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 60 दिन का अतिरिक्त समय दे दिया है. बलियान को गिरफ्तार किए 3 मार्च को 90 दिन पूरा हो जाएगा. दिल्ली पुलिस ने अर्जी दाखिल कर कहा कि 90 दिन की समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नही कर सकते, क्योंकि इस मामले में आगे जांच करनी बाकी है, लिहाजा कोर्ट जांच के लिए 90 दिन की और अतिरिक्त समय दे.

जिसका बलियान की ओर से पेश वकील एम एस खान ने विरोध किया, कहा कि पब्लिक प्रॉस्क्यूटर की रिपोर्ट को मानना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट को यह भी देखना चाहिए कि कानून 90 दिन का अतिरिक्त समय एक साथ दिया जा सकता है या टुकड़ों में. लेकिन कोर्ट ने वकील एम एस खान की दलीलों को खारिज करते हुए, दिल्ली पुलिस को आगे की जांच के लिए 60 दिन का और अतिरिक्त समय दे दिया है. हालांकि एम एस खान अदालत के इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं.

सप्लिमेंट्री चार्जशीट पर लिया संज्ञान

विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने मामले में सह आरोपी रोहित उर्फ अन्ना और सचिन चिंकारा के खिलाफ दाखिल सप्लिमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है. कोर्ट 12 मार्च को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.मकोका 1999 में अस्तित्व में आया था. इसे मुंबई जैसे महानगर में अंडरवर्ल्ड व संगठित अपराधियों पर नकेल कसने के लिए बनाया गया था. लेकिन मकोका के तहत मुकदमा दर्ज करने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति जरूरी है.

इसमें किसी आरोपी के खिलाफ तभी मुकदमा दर्ज होगा, जब 10 साल के दौरान वह कम से कम दो संगठित अपराधों में शामिल रहा हो. संगठित अपराध में कम से कम दो लोगों का शामिल होना जरूरी है. इसके अलावा आरोपी के खिलाफ एफआईआर के बाद चार्जशीट दाखिल की गई हो. अगर पुलिस 180 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं करती हैं तो आरोपी को जमानत मिल जाएगी. 2002 में दिल्ली सरकार ने भी इसे लागू कर दिया. फिलहाल महाराष्ट्र के अलावा दिल्ली में भी यह कानून लागू है.

कपिल सांगवान नफे सिंह हत्याकांड का मास्टरमाइंड

मकोका के तहत पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन का वक्त मिल जाता है. जबकि आईपीसी के प्रावधानों के तहत यह समय. सीमा सिर्फ 60 से 90 दिन की है. मकोका के तहत आरोपी की रिमांड 30 दिन तक हो सकती है, जबकि आईपीसी के तहत यह अधिकतम 15 दिन की होती है. जबरन वसूली के मामले में 30 नवंबर को बलियान को गिरफ्तार किया गया था. लेकिन इस मामले में जमानत मिलने के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें मकोका के तहत गिरफ्तार कर लिया.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक नरेश बालियान और गैंगेस्टर कपिल सांगवान के बीच बातचीत का ये मामला 2023 का है. इसे लेकर 2023 में एफआईआर दर्ज कराई गई थी. कपिल सांगवान एक कुख्यात गैंगेस्टर है, जो फिलहाल ब्रिटेन में रह रहा है. कपिल सांगवान पिछले पांच वर्षों से ब्रिटेन में है. कपिल सांगवान और नरेश बालियान दोनों दिल्ली के नजफगढ़ के रहने वाले हैं. कपिल सांगवान हरियाणा के नफे सिंह हत्याकांड का भी मास्टरमाइंड है. कपिल सांगवान पर बल्लू पहलवान और बीजेपी नेता सुरेंद्र मटियाला की हत्या का भी मास्टरमाइंड माना जाता है.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital