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प्रदूषण का ‘जेल’ बनी दिल्ली! क्या पराली नहीं, शहर का भूगोल ही है जहरीली हवा के लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार? पढ़ें- EXPLAINER

Delhi pollution Real Reason: दिल्ली की हवा को जहरीला करने में इसका भूगोल भी काफी हद तक जिम्मेदार है. दिल्ली का भूगोल प्रदूषण को एक जेल की तरह कैद कर देता है. जिसकी वजह से दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी में बदल जाती है.

Delhi pollution Real Reason

Delhi pollution Real Reason: सर्दियों के दस्तक के साथ ही दिल्ली की हवा जहरीली हो गई है. हालत ये है कि बिना मास्क के लोग घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं. धूंध और कोहरे की वजह से दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं बची. आज दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 305 के पार पहुंच गया है. सामान्य रूप से कहें तो यह ‘बेहद खराब’ की श्रेणी में आता है. लेकिन दिल्ली का यह प्रदूषण संकट केवल पराली या पटाखे जलाने से नहीं जुड़ा है. दिल्ली की हवा को जहरीला करने में इसका भूगोल भी काफी हद तक जिम्मेदार है.

विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली का भूगोल प्रदूषण को एक जेल की तरह कैद कर देता है. जिसकी वजह से दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी में बदल जाती है.

दिल्ली का क्या है भूगोल?

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इंडो-गंगा मैदान में स्थित है. यह हिमालय की तलहटी से लेकर दक्षिण और दक्षिण पश्चिम में अरावली की पहाड़ियों तक फैला है. इसकी भौगोलिक संरचना एक कटोरे की तरह है. जिसके चारों तरफ ऊंची-ऊंची संरचरनाएं मौजूद हैं. उत्तर में हिमालय, दक्षिण और दक्षिण पश्चिम में अरावली, पश्चिम में मालवा का पठार मौजूद है. जो तीन तरफ से दिल्ली की हवाओं को कैद कर देता है. जिसकी वजह से प्रदूषित हवाएं दिल्ली के उपर ही मंडराती रहती हैं.

आउटलुक इंडिया से बात करते हुए भारतीय उष्ण कटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) पुणे के वैज्ञानिक गुहरान बेग ने बताया कि दिल्ली का भूगोल एक तालाब की तरह है. जहां प्रदूषक फंस जाते हैं. जब सर्दियां होती हैं तो यह और भी घातक हो जाता है. क्योंकि पीएम 2.5 कण फंसकर दिल्ली के ऊपर ही मंडराते रहते हैं. जिसकी वजह से दिल्ली में फॉग और कोहरे जैसा माहौल दिखता है.

भूगोल है जिम्मेदार

वहीं रीडिंग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं अंकित भंडेकर और लॉरा विल्कॉक्स ने अपनी रिसर्च में दिल्ली के भूगोल को काफी हद तक प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराया है. उनकी रिसर्च के मुताबिक दिल्ली की प्रदूषित हवाएं अपने चारों तरफ मौजूद ऊंची संरचनाओं से टकराकर कैद हो जाती हैं. जिसकी वजह से ये प्रदूषित हवाएं बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने में देरी करती हैं.

तापमान और हवाओं की स्थिति भी हैं जिम्मेदार

दिल्ली का भूगोल सर्दी के मौसम में और भी खतरनाक हो जाता है. जब सर्दियां आती हैं तो टेम्परेचर इनवर्जन जैसे कारक होते हैं. जहां सतह पर मौजूद ठंडी हवाओं के ऊपर गर्म हवाओं की परत चढ़ जाती है. यह एक तरह से चाय की केतली के ढक्कन की तरह काम करती हैं. जो प्रदूषित हवाओं को ऊपर उठने से रोकता है.

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घट जाती है मिक्सिंग हाइट

सर्दियों में हल्की हवाएं तापमान को जमीन के पास कैद कर लेती हैं. जिसकी वजह से स्मॉग और गहरा हो जाता है. सर्दियों में इन गर्म और हल्की हवाओं की वजह से भारी और ठंडी हवाएं बहुत ऊंचाई तक नहीं जा पाती हैं. सर्दियों में दिल्ली की मिक्सिंग हाइट घटकर मात्र कुछ सौ मीटर हो जाती हैं. जो गर्मियों में कम से कम 1 किलोमीटर होती हैं. मिक्सिंग हाइट वह ऊंचाई होती है जहां प्रदूषण फैल सकता है.

IIMT के वैज्ञानिक गुहरान बेग दिल्ली के भूगोल को ही प्रदूषण का असली जिम्मेदार ठहराते हैं. उनका कहना है कि जरूरी मौसम अनुसार नीतियों को लाकर ही दिल्ली के प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है. इसका कोई स्थाई समाधान मौजूद नहीं है.

-भारत एक्सप्रेस



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