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दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया मिलिया इस्लामिया को ओबीसी छात्रों को कोचिंग देने पर जवाब देने का निर्देश दिया

कोर्ट ने जामिया मिलिया इस्लामिया को अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को सिविल सेवा की तैयारी के लिए कोचिंग देने पर जवाब देने का निर्देश दिया है

Jamia Millia Islamia

जामिया मिलिया इस्लामिया

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

दिल्ली हाईकोर्ट ने सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए आवासीय कोचिंग अकादमी में अन्य पिछड़ा वर्ग (गैर-क्रीमी लेयर) छात्रों को भी कोचिंग देने के मामले में जामिया मिलिया इस्लामिया से जवाब मांगा है. मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने इस मामले में विविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से भी जवाब मांगा है.

कोचिंग देने की मांग को लेकर जनहित याचिका दाखिल

कोर्ट 28 फरवरी को अगली सुनवाई करेगा. पिछड़ा वर्ग के छात्रों को भी अकादमी में कोचिंग देने की मांग करते हुए विधि स्नातक सत्यम सिंह ने जनहित याचिका दाखिल की है. उन्होंने यूजीसी के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि जामिया मुफ्त कोचिंग को केवल छात्राओं एवं अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तथा अल्पसंख्यक समुदायों तक सीमित नहीं कर सकता है. उसका दायित्व ओबीसी (गैर-क्रीमी लेयर) और आर्थिक रूप से कमजोर वगरे (ईडब्ल्यूएस) को लाभ प्रदान करना है. कोर्ट ने कहा कि यूजीसी के दिशा-निर्देशों में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए कोई प्रावधान नहीं है.

उसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी राहत केवल ओबीसी (गैर-क्रीमी लेयर) तक ही सीमित रखी. फिर पीठ ने कहा कि कोई भी विविद्यालय यूजीसी के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है. इस वजह से प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाता है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से ओबीसी (गैर-क्रीमी लेयर) उम्मीदवार के रूप में कोचिंग अकादमी में प्रवेश लेने के अधिकार पर सवाल उठाया था. उसने कहा कि आप हमसे नीति को नए सिरे से तैयार करने के लिए कह रहे हैं. प्रवेश नियमित पाठय़क्रमों में नहीं, बल्कि कोचिंग सेंटरों में दिया जाता है. आरक्षण प्रदान करना प्राधिकारियों का काम है. आप हमसे अधिकार बनाने के लिए कह रहे हैं. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आकाश वाजपेयी ने कहा है कि यूजीसी ने जामिया सहित चार केंद्रीय विविद्यालयों को वित्तीय सहायता दी है. इसलिए उसका यह दायित्व है कि वह वंचित छात्रों से भेदभाव न करे.

समाज के सभी वर्गो को समान अवसर प्रदान

याचिका में कहा गया है कि आवासीय कोचिंग अकादमी के लिए वर्तमान प्रवेश नीति मनमानी और भेदभावपूर्ण है. क्योंकि उसमें उन छात्रों की श्रेणी को छोड़ दिया गया है जो प्रवेश के हकदार थे. आवासीय कोचिंग अकादमी का उद्देश्य वंचित वर्ग के छात्रों को कोचिंग प्रदान करके समान विकास के लिए समाज के सभी वर्गो को समान अवसर प्रदान करना है.


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-भारत एक्सप्रेस



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