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Central Vista Project: दिल्ली वक्फ बोर्ड से हाईकोर्ट ने कहा— जब भी सरकार कार्रवाई करे तो हमारे पास आ जाएं

Delhi Waqf Board: दिल्ली हाईकोर्ट ने आज दिल्ली वक्फ बोर्ड को बड़ी राहत दी. कोर्ट ने बोर्ड से कहा कि जब भी केंद्र सरकार सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के संबंध में उसकी संपत्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करती है तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है. कोर्ट ने बोर्ड से याचिका वापस लेने को कहा.

delhi waqf board

दिल्ली वक्फ बोर्ड

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Central Vista Redevelopment Project: दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली वक्फ बोर्ड से कहा है कि जब भी केंद्र सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के संबंध में उसकी संपत्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करे तो वक्फ बोर्ड अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है. आज न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि परियोजना को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिल गई है और बोर्ड से 2021 में दायर अपनी याचिका वापस लेने को कहा है — जिसमें अपनी 6 संपत्तियों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए निर्देश मांगे गए थे.

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में पेश वरिष्ठ वकील ने जोर देकर कहा कि वक्फ बोर्ड यह नहीं कह रहा है कि सेंट्रल विस्टा परियोजना को खत्म किया जाना चाहिए, बल्कि केवल यह आश्वासन मांग रहा है कि उसे उसकी संपत्तियों से बेदखल नहीं किया जाएगा. न्यायाधीश ने कहा इस याचिका को वापस लें। हम इसे जटिल नहीं बनाना चाहते. जब भी वे कोई कार्रवाई करेंगे आप आ सकते हैं. अदालत ने बोर्ड को आवश्यकता पड़ने पर नई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस लेने की अनुमति दी.

Delhi Waqf Board

वक्फ बोर्ड ने 2021 में भी अदालत का रूख किया था

बोर्ड ने 2021 में उस क्षेत्र में अपनी छह संपत्तियों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसमें उस समय पुनर्विकास कार्य चल रहा था. इसमें मानसिंह रोड पर मस्जिद ज़ब्ता गंज, रेड क्रॉस रोड पर जामा मस्जिद, उद्योग भवन के पास मस्जिद सुनहरी बाग रोड, मोतीलाल नेहरू मार्ग के पीछे मजार सुनहरी बाग रोड, कृषि भवन परिसर के अंदर मस्जिद कृषि भवन और भारत के उपराष्ट्रपति के आधिकारिक आवास पर मस्जिद उपाध्यक्ष शामिल हैं.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह कहा था

दिसंबर 2021 में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया था कि परियोजना के आसपास के क्षेत्र में दिल्ली वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कुछ नहीं हो रहा है और कहा कि लंबी योजना होने के कारण, पुनर्विकास संबंधित संपत्तियों तक नहीं पहुंचा है. उच्च न्यायालय ने तब यह कहते हुए सुनवाई स्थगित कर दी थी कि उसे सॉलिसिटर जनरल पर पूरा भरोसा है और याचिकाकर्ता के वकील के बयान को रिकॉर्ड पर लेने के अनुरोध को ठुकरा दिया था. पिछले साल दिसंबर में वक्फ के वकील ने दावा किया था कि कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान सुनहरी बाग मस्जिद के पास स्थित मजार को ध्वस्त कर दिया गया था. हालांकि, केंद्र के वकील ने कहा था कि मजार को नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) ने ध्वस्त किया था और संपत्तियों के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.

Delhi Waqf Board Case

एक साधारण मस्जिद से कहीं अधिक हैं संपत्तियां: बोर्ड

दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अपनी याचिका में दावा किया है कि पुनर्विकास क्षेत्र में छह संपत्तियां एक साधारण मस्जिद से कहीं अधिक हैं और उनके साथ एक विशिष्टता जुड़ी हुई है, न तो ब्रिटिश सरकार और न ही भारत सरकार ने कभी इन संपत्तियों पर धार्मिक प्रथाओं के पालन में कोई बाधा उत्पन्न की, जिन्हें हमेशा संरक्षित किया गया था. वकील वजीह शफीक के माध्यम से दायर याचिका में दावा किया गया है.

दावा— सभी वक्फ संपत्तियां 100 साल से अधिक पुरानी

वर्तमान याचिका का विषय, सभी वक्फ संपत्तियां 100 साल से अधिक पुरानी हैं और उनका लगातार धार्मिक उद्देश्य के लिए उपयोग किया जा रहा है. ऐसा नहीं है कि सरकारी इमारतें पहले बनाई गईं और उसके बाद ये संपत्तियां अस्तित्व में आईं. इसके विपरीत, ये संपत्तियां तब भी अस्तित्व में थीं जब सरकारी इमारतों का निर्माण उनके आसपास या आसपास किया गया था.

— भारत एक्सप्रेस



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