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दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश: शाही ईदगाह पार्क में रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित करें संबंधित एजेंसी

शाही ईदगाह पार्क मुगल काल के दौरान निर्मित एक प्राचीन संपत्ति है, जिसका उपयोग नमाज अदा करने के लिए किया जा रहा है.

Rani Lakshmi Bai
Vikash Jha Edited by Vikash Jha

शाही ईदगाह पार्क में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति लगाने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान ईदगाह मैनेजमेंट कमेटी की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि शाही ईदगाह पार्क में मूर्ति लगाई जा चुकी है. दिल्ली हाईकोर्ट ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि तीन सदस्यीय टीम उस जगह पर जाए और देखकर बताए कि मूर्ति कहां स्थापित की गई है.

वहीं डीडीए ने कहा कि हम धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं. मूर्ति के तीन तरफ दीवार लगाई गई है. मूर्ति को पार्क के कोने में लगाया गया है. मूर्ति ईदगाह की दीवार से 200 मीटर दूर लगाई गई है. कोर्ट 7 अक्टूबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान शाही ईदगाह मैनेजिंग कमिटी ने कोर्ट से लिखित माफी मांग ली थी.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने वकील को लिखित में माफीनामा देने को कहा था. कोर्ट ने कहा था कि कृपया साम्प्रदायिक राजनीति को अदालत की चौखट से बाहर रखें. अपील में इस्तेमाल भाषा को अपमानजनक मानते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि साफ तौर पर यहां अदालत के जरिए साम्प्रदायिक राजनीति करने की कोशिश हो रही है. यहां अदालत को संबोधित नहीं किया जा रहा है. बल्कि अदालत के जरिए किसी और को संबोधित किया जा रहा है.

कोर्ट ने कहा था कि यह वही इलाका है, जिसके सौन्दर्यकरण का हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस, डीडीए ओर एमसीडी को निर्देश दिया था. वह भी आपके ही लोगों के अनुरोध पर. पार्क से अतिक्रमण हटाकर जब ऑथोरिटीज ने काम करना शुरू किया तो आप प्रतिमा को मुद्दा बनाकर यहां आ गए. झांसी की रानी की प्रतिमा लगाने से इलाके में कानून व्यवस्था बिगड़ने की दलील पर नाराजगी भी जाहिर किया था.

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कोर्ट ने कहा था वह नेशनल हीरो हैं. यह गर्व की बात है. इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता शाही ईदगाह के आसपास के पार्क के रख-रखाव का विरोध करने के लिए कोई कानूनी या मौलिक अधिकार नहीं है. समिति ने 1970 में प्रकाशित एक गजट अधिसूचना के हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि शाही ईदगाह पार्क मुगल काल के दौरान निर्मित एक प्राचीन संपत्ति है, जिसका उपयोग नमाज अदा करने के लिए किया जा रहा है. यह कहा गया था कि इतने बड़े परिसर में एक समय में 50000 से अधिक लोग नमाज अदा कर सकते हैं. 

-भारत एक्सप्रेस



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