Delhi Winter Action Plan: अक्टूबर की गुलाबी ठंड दस्तक देने को ही होती है कि दिल्ली-एनसीआर के लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं. दिल्ली में सर्दियों का आना सिर्फ सुहाने मौसम की शुरुआत नहीं, बल्कि सांसों पर मंडराने वाले ‘साइलेंट किलर’ यानी जानलेवा स्मॉग की आहट भी होता है. हर साल नवंबर आते-आते दिल्ली की हवा एक गैस चैंबर में तब्दील हो जाती है, जिससे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को सांस लेने में भारी दिक्कतों, आंखों में जलन और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता है.
लेकिन इस बार दिल्लीवासी सर्दियों में राहत की सांस ले सकेंगे. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने इतिहास में पहली बार कड़ा कदम उठाते हुए हफ्तों पहले से ही बारूद की तरह सुलगने वाले इस प्रदूषण से निपटने का फुलप्रूफ चक्रव्यूह तैयार कर लिया है. CMO द्वारा घोषित यह समयबद्ध, तकनीकी रूप से उन्नत और व्यापक विंटर एक्शन प्लान साफ हवा के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
क्यों डराती हैं दिल्ली की सर्दियां?
दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान प्रदूषण का स्तर सामान्य से कई गुना ऊपर चला जाता है. पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि क्यों दिल्ली को समय रहते इस मास्टर प्लान की सख्त जरूरत थी.
- नवंबर से जनवरी के बीच दिल्ली का AQI अक्सर 450 से 500 (गंभीर प्लस श्रेणी) के पार पहुंच जाता है, जो सामान्य से 10 गुना अधिक विषैला होता है.
- ठंड के मौसम में ठंडी हवा और कम गति के कारण PM 2.5 का स्तर 300 से 400 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच जाता है, जबकि सुरक्षित सीमा महज 60 होती है.
- दिल्ली के अस्पतालों की ओपीडी OPD में सांस और अस्थमा के मरीजों की संख्या में अचानक 30 से 40 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाती है.
दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान (Delhi Pollution Master Plan)
सर्दियों के इन चार महीनों के दौरान प्रदूषण पर चौतरफा वार करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने बेहद कड़े और अभूतपूर्व नियमों को लागू करने की घोषणा की है. इससे उम्मीद जताई जा रही है कि इन ठंडो में दिल्ली का राहत रहेगा.
- 1 नवंबर से दिल्ली के सभी पेट्रोल पंपों पर ‘नो PUC, नो फ्यूल’ का नियम सख्ती से लागू होगा. PUC न होने पर गाड़ियों को ईंधन नहीं दिया जाएगा.
- दिल्ली के बाहर से आने वाले ऐसे सभी कमर्शियल और भारी वाहन, जो BS-VI मानकों को पूरा नहीं करते हैं, उनके दिल्ली में प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा.
- प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंचते ही सरकारी और निजी दफ्तरों के 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) की व्यवस्था लागू की जाएगी.
- वाहनों के बेतरतीब इस्तेमाल को कोरने के लिए पार्किंग शुल्कों में भारी बढ़ोतरी की जाएगी, जिससे लोग बस और मेट्रो जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का रुख करें.
- सभी बड़ी कंस्ट्रक्शन साइटों पर एंटी-स्मॉग और मिस्ट सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा. निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल पर सख्त नियंत्रण रखा जाएगा.
- सर्दियों में खुले में कचरा, सूखी पत्तियां या किसी भी प्रकार का बायोमास जलाने पर पूरी तरह से रोक रहेगी.
- नियमों का उल्लंघन करने वाले फैक्ट्रियों, भट्टों और कंस्ट्रक्शन साइटों पर नजर रखने के लिए हाई-टेक ड्रोनों की तैनाती की जाएगी और भारी जुर्माना लगाया जाएगा.
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रेखा गुप्ता की अग्रिम सोच की चहुंओर सराहना (Delhi AQI Winter Control Measures)
आमतौर पर देखा गया है कि जब दिल्ली की हवा पूरी तरह दमघोंटू हो जाती है, तब प्रशासन जागता है और आनन-फानन में ग्रैप (GRAP) के नियम थोप दिए जाते हैं. लेकिन इस बार मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने संकट आने का इंतजार नहीं किया. सर्दियों की शुरुआत से हफ्तों पहले इतने व्यापक और टेक्नोलॉजी पर आधारित ‘विंटर मास्टर प्लान’ को सार्वजनिक करना मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच और प्रशासनिक परिपक्वता का जीवंत प्रमाण है. अग्रिम योजना बनाने का सरकार का यह साहसिक कदम न केवल दिल्ली के हर नागरिक को स्वस्थ सर्दियां देने में मील का पत्थर साबित होगा.
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