आज (3 जुलाई 2026) से ग्रेटर हिमालय की ऊंची और बर्फीली वादियों में एक बार फिर ‘बम-बम भोले’ के जयकारे गूंजने लगे हैं. करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र, पवित्र अमरनाथ यात्रा 2026 (Amarnath Yatra 2026) का विधिवत शंखनाद हो चुका है. गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसके बाद आज दोपहर तक पहला जत्था बाबा बर्फानी के दरबार में हाजिरी लगाएगा.
4,800 से ज्यादा भक्तों का जत्था रवाना
बालटाल के डोमेल और पहलगाम बेस कैंप से 4,822 तीर्थयात्रियों का पहला जत्था 259 वाहनों के कड़े सुरक्षा घेरे में पवित्र गुफा की ओर बढ़ चुका है. 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित प्राकृतिक शिवलिंग (बाबा बर्फानी) के दर्शन के लिए इस साल भक्तों का उत्साह चरम पर है. उम्मीद है कि 28 अगस्त 2026 तक चलने वाली इस 57 दिनों की यात्रा में 4 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन का लाभ उठाएंगे.
हर 2 KM पर ऑक्सीजन
इस बार श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड और प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा और सहूलियत के लिए ‘फुल-प्रूफ’ इंतजाम किए हैं. ऊंचाई पर सांस लेने में दिक्कत न हो, इसके लिए हर 2 किलोमीटर पर ऑक्सीजन बूथ (Oxygen Booths) बनाए गए हैं. बालटाल के डोमेल रूट पर 4 जगहों पर बड़ी स्क्रीन लगाई गई हैं, जहां मौसम का पल-पल का अपडेट मिलेगा. मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए प्रशासन की सख्त हिदायत है कि श्रद्धालुओं को दर्शन के बाद तुरंत नीचे लौटना होगा.
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सुरक्षा ऐसी कि परिंदा भी पर न मार सके
जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे से लेकर पवित्र गुफा तक सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम हैं. बनिहाल और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर भारतीय सेना (Indian Army), पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने चप्पे-चप्पे पर मोर्चा संभाल लिया है. ड्रोन से निगरानी, एरिया डोमिनेशन पेट्रोलिंग और नए सुरक्षा पोस्टों के जरिए 24 घंटे अलर्ट जारी है, ताकि भोले के भक्तों को एक सुरक्षित, सुगम और यादगार यात्रा का अनुभव मिल सके.
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