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सिंघु बॉर्डर (एनएच-44) को खोलने की मांग, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिल्ली पुलिस कमिश्नर से संपर्क करने को कहा

याचिकाकर्ता ने बंद सिंधु बॉर्डर को खोलने के निर्देश देने की मांग की थी. याचिका में कहा गया था कि इसने यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग प्रदान किए बिना यातायात के सुचारू प्रवाह में बाधा डालकर महत्वपूर्ण असुविधा पैदा की है.

delhi high court

दिल्ली हाईकोर्ट.

Prashant Rai Edited by Prashant Rai

बंद सिंघु बॉर्डर (एनएच-44) को खोलने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिल्ली पुलिस कमिश्नर से संपर्क करने को कहा है. याचिकाकर्ता ने बंद सिंधु बॉर्डर को खोलने के निर्देश देने की मांग की थी. याचिका में कहा गया था कि इसने यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग प्रदान किए बिना यातायात के सुचारू प्रवाह में बाधा डालकर महत्वपूर्ण असुविधा पैदा की है.

मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने याचिकाकर्ता को पुलिस आयुक्त से संपर्क करने के निर्देश जारी करने के बाद याचिका का निपटारा कर दिया.

तीन याचिकाकर्ताओं लतीफ गार्डन के शंकर मोर, अग्रसेन कॉलोनी के सचिन अनेजा और रायर कलां के शिवम धमीजा ने अपने अधिवक्ता मोहित गुप्ता के माध्यम से दिल्ली उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की थी. याचिका में सिंघु सीमा पर व्यापक सड़क अवरोध पर प्रकाश डाला गया है, जिसे दिल्ली पुलिस द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के हिस्से के रूप में रखा गया था ताकि इस साल की शुरुआत में किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच विफल वार्ता के बाद किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोका जा सके.

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याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि दिल्ली और हरियाणा के बीच सुरक्षित और सुचारू यात्रा के लिए वैकल्पिक मार्ग प्रदान किए बिना सिंघु सीमा कई महीनों से अवरुद्ध है. नतीजतन यात्रियों को गांवों के माध्यम से पास की सहायक सड़कों का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिनमें से कई खराब स्थिति में हैं जिससे यात्रा खतरनाक हो गई है.

नाकाबंदी ने बड़े पैमाने पर ट्रैफिक जाम सहित महत्वपूर्ण व्यवधान पैदा किया है दिल्ली और गुरुग्राम में काम करने वाले और काम के लिए पानीपत आने-जाने वाले याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि नाकेबंदी के कारण उन्हें नियमित रूप से देरी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वे समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. याचिकाकर्ता ने याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला कि सात महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी, सिंघु सीमा पर किसानों का कोई विरोध प्रदर्शन न होने के बावजूद, अधिकारियों ने सड़क को अवरुद्ध करना जारी रखा है.

-भारत एक्सप्रेस



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