प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए बैंकिंग सेक्टर को लेकर एक बड़ा लक्ष्य सामने रखा. उन्होंने कहा कि अब भारत को सिर्फ अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि दुनिया के सामने भी अपनी ताकत दिखानी होगी. इसी सोच के तहत प्रधानमंत्री ने लक्ष्य रखा कि कम से कम एक भारतीय बैंक दुनिया के टॉप-5 बैंकों में अपनी जगह बनाए.
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आज पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में है और इसमें बैंकिंग सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. पिछले करीब एक दशक में भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में बड़े स्तर पर बदलाव हुए हैं. अब जरूरत इस बात की है कि देश के बैंक वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान मजबूत करें.
बैंकिंग के साथ फार्मा सेक्टर पर भी जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सिर्फ बैंकिंग की बात नहीं की. उन्होंने फार्मा सेक्टर को लेकर भी बड़ा लक्ष्य रखा. उनका कहना था कि दुनिया की टॉप-5 फार्मा कंपनियों में कम से कम एक कंपनी भारत की होनी चाहिए.
दरअसल, ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य केवल सरकार की योजनाओं तक सीमित नहीं है. इसके लिए देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी मानी जा रही है. प्रधानमंत्री ने भी साफ कहा कि इस बदलाव को जमीन पर उतारने के लिए सरकार के साथ-साथ उद्योग जगत और देश के नागरिकों को मिलकर काम करना होगा.
बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलावों की बात करें तो पिछले कुछ वर्षों में सरकारी बैंकों के विलय की प्रक्रिया इसका अहम हिस्सा रही है. साल 2017 से पहले देश में कुल 27 सरकारी बैंक थे. कई बैंकों के विलय के बाद इनकी संख्या घटकर 12 रह गई.
सरकार का मकसद सिर्फ बैंकों की संख्या कम करना नहीं था. इसके पीछे बड़े और मजबूत बैंक तैयार करने की सोच भी थी, ताकि वे देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था और बड़े उद्योगों की वित्तीय जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकें और आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी पहले भारत में बड़े बैंकों की जरूरत पर जोर दे चुकी हैं. उनका कहना रहा है कि देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को देखते हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) जैसे 4-5 बड़े बैंक होने चाहिए और इनमें से कम से कम एक बैंक का वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थान होना चाहिए.
जल्द बनेगी हाई-लेवल कमेटी
इसी दिशा में केंद्र सरकार अब एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘PSB कॉन्फ्लुएंस 2026’ में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार जल्द ही बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की समीक्षा के लिए एक हाई-लेवल कमेटी के गठन की घोषणा करेगी.
इस सम्मेलन का आयोजन वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) ने किया. इसका फोकस भारतीय बैंकिंग सेक्टर को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के मुताबिक तैयार करना और बदलती आर्थिक जरूरतों के हिसाब से आगे की रणनीति तय करना था.
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के बैंकिंग सेक्टर पर चर्चा के लिए यह बिल्कुल सही समय है. उन्होंने संकेत दिया कि कमेटी अपनी सिफारिशें और सुझाव तैयार करने के बाद सरकार उन पर तेजी से आगे बढ़ेगी. इसके आधार पर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी फैसले लिए जा सकते हैं.
युवाओं को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने पर भी जोर
वित्त मंत्री ने देश के युवाओं को भविष्य की बैंकिंग व्यवस्था का अहम हिस्सा बताया है. सरकार का जोर नई पीढ़ी को वित्तीय सेवाओं से जोड़ने पर भी है. डिजिटल बैंकिंग और तेजी से बदलती वित्तीय जरूरतों के दौर में युवाओं की भूमिका आने वाले वर्षों में और बढ़ने की उम्मीद है.
ये भी पढ़ें-नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान, वसुंधरा राजे को उपाध्यक्ष पद मिला, स्मृति ईरानी को बड़ी जिम्मेदारी
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


