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छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का ‘विदेशी’ कनेक्शन, अमेरिका से आ रहा था पैसा, ED की रेड में बड़ा खुलासा

Chhattisgarh religious conversion case: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में अमेरिका से धर्मांतरण के लिए 95 करोड़ रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ है. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचा यह फंड अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है.

Chhattisgarh bastar religious conversion case

रिपोर्ट- प्रियंका कौशल


Chhattisgarh religious conversion case: कभी हमारे पड़ोस में, मोहल्ले या शहर में रहने वाला कोई परिचित अपना धर्म परिवर्तन कर ले तो हम ये सोचते रह जाते हैं कि आखिर इसने ऐसा क्यों किया? ये बात छत्तीसगढ़ के संदर्भ में ज्यादा लाजिमी है क्योंकि यहां ये आम बात हो चली है. छत्तीसगढ़ के साथ देश के जनजातीय क्षेत्र के निवासी धर्म परिवर्तन शब्द से भलीभांति परिचित हैं. ऐसे में ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय द्वारा चौंकाने वाले खुलासे ने छत्तीसगढ़ में राजनीतिक उठापटक तेज कर दी है.

ईडी ने भारत मे धर्मान्तरण करवा रही एक ईसाई मिशनरी के रैकेट को पकड़ा है, जिसके तार सीधे अमेरिका से जुड़े हुए हैं. इतना ही नहीं ये धन छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों तक भेजा जाता था ताकि वहां धर्मान्तरण करवाया जा सके. आशंका ये भी है कि ये राशि नक्सलियों को भी पहुंचाई गई हो. ईडी ने एक प्रेस नोट जारी कर मीडिया को बताया है कि अमेरिका की मिशनरी संस्था ‘द टिमोथी इनिशिएटिव (TTI)’ के बीच देशभर में लगभग 95 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है. इसमें से साढ़े छह करोड़ रुपया छत्तीसगढ़ के धमतरी और बस्तर भी भेजा गया.

बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

इसे लेकर भाजपा का कहना है कि ED ने विदेशी फंडिंग के मार्फत से अवैध धर्मांतरण का एक नेक्सस ओपन किया है. कांग्रेस सदैव इस एजेंसी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर अवैध धर्मांतरण करने वालों के लिये कवच का काम करती है. मामले को लेकर कांग्रेस का रुख भी सख्त है. कांग्रेस ने पूरे प्रकरण में बीजेपी पर ही सन्देह जताया है.

डेबिट कार्ड का क्या है खेल?

जांच में पता चला कि विदेशी बैंक डेबिट कार्ड के माध्यम से भारत में बार-बार कैश निकाला जा रहा था. अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक के डेबिट कार्ड भारत लाए गए और एटीएम के जरिए लगातार नकदी निकाली गई. पिछले कुछ वर्षों में इन कार्डों से छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में ‘असामान्य’ और ‘संदिग्ध’ तरीके से बड़ी रकम निकाले जाने के प्रमाण मिले हैं. इस फंडिंग का संबंध द टिमोथी इनिशिएटिव नामक मिशनरी से जुड़ा हुआ है, जो ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार करती है. जबकि यह संस्था विदेशी चंदा विनियमन कानून (FCRA) के तहत पंजीकृत नहीं है.


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ईडी की जांच से इतर बात करें तो हम सभी जानते हैं कि बस्तर पूर्ण रूप से और धमतरी आंशिक रूप नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है. यहां कुछ बरस पहले तक जिन इलाकों में सड़क और बिजली नहीं पहुंची थी, वहां चर्च, पादरी और पास्टर पहुंच चुके थे. छत्तीसगढ़ के माओवादी हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में जहां आम आदमी जाने से हिचकता था, वहां ईसाई मिशनरीज के लोग बेखौफ आते- जाते व रहते थे. ऐसे में प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या धन का लेन-देन ही नक्सलियों और मिशनिरयों के गठजोड़ का अहम कारण था? ये भी सिद्ध होता दिख रहा है कि मिशनरीज नक्सलियों को धन मुहैया कराती हो और नक्सली उन्हें सरंक्षण.

-भारत एक्सप्रेस



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