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Digital Rape: क्या है डिजिटल रेप, दोषी को क्या सजा मिलती है…चर्चा में क्यों?

डिजिटल रेप सुनने में जैसा लग रहा है वैसा बिल्कुल नहीं है. इसमें टेक्नोलॉजी या इंटरनेट का को कोई रोल नहीं है. डिजिटल रेप का मतलब है बिना सहमति के महिला या पुरुष के प्राइवेट पार्ट में हाथ या पैर की उंगली  डालना.

Digital Rape: हरियाणा के गुरूग्राम के मेंदांता अस्पताल में आईसीयू में भर्ती एक एयरहोस्टेस से डिजिटल रेप का मामला सामने आया है. महिला वेंटिलेटर पर लगभग बेहोशी की हालत में थीं जब आरोपी ने उसके साथ घिनौनी हरकत की. पूरा मामला तब सामने आया जब 46 वर्षीय महिला ने होश में आने के बाद 14 अप्रैल को सदर थाने में शिकायत दर्ज करवाई. महिला ने बताया कि वह 5 अप्रैल को अस्पताल में एडमिट हुई थी. 6 अप्रैल को आरोपी ने वेस्टबैंड चेक करने के दौरान उसने मेरा डिजिटल रेप किया. जबकि उस कमरे में मौजुद दो नर्सों ने कुछ नहीं किया.

शिकायत के बाद पुलिस ने अस्पताल के 800 सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद दीपक कुमार नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया. दीपक बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और हाल ही में मेदांता अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी में डिग्री लेकर नौकरी कर रहा था. आरोपी दीपक पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

आइए जानते हैं डिजिटल रेप क्या होता है

डिजिटल रेप सुनने में जैसा लग रहा है वैसा बिल्कुल नहीं है. इसमें टेक्नोलॉजी या इंटरनेट का को कोई रोल नहीं है. डिजिटल रेप का मतलब है बिना सहमति के महिला या पुरुष के प्राइवेट पार्ट में हाथ या पैर की उंगली  डालना. यहां डिजिटल शब्द का डिजीट से लिया गया है, जिसका मतलब होता है संख्या. डिजिटल रेप को दुनिया भर के चिकित्सा पेशेवरों और मानवाधिकार समूहों ने व्यक्तिगत गरिमा का गंभीर उल्लंघन माना है.

भारत में दिसंबर 2012 में हुई निर्भया कांड के बाद आईपीसी के तहत डिजिटल रेप बलात्कार की कैटेगरी में शामिल किया गया. जबकि नए कानून BNS में इसे गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है.

क्या है कानून और कितनी मिलती है सजा

भारत में डिजिटल रेप को गंभीर अपराध मानते हुए कठोर सजा का प्रावधान है. पहले आईपीसी की धारा 375-376 के तहत दोषी के लिए सजा का प्रावधान था. जिसमें कम से कम 7 साल की सजा हो सकती है जो कुछ मामलों में 10 साल तक या आजीवन कारावास तक बढ़ सकती है. अगर पीड़ित नाबालिग है तो पॉक्सो एक्ट के तहत सजा और सख्त होती है जिसमें 10 से 20 साल तक की जेल या उम्रकैद भी हो सकती है.

वहीं अब नए कानून के तहत इसे रेप की कैटेगरी में रखा गया है. इसमें पीड़िता की सहमति के बिना कोई भी ऐसा कृत्य अपराध माना जाएगा और दोषी पाए जाने पर आरोपी को 10 साल तक की जेल या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है.

-भारत एक्सप्रेस



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