सरला माहेश्वरी
भारतीय टेलीविजन समाचार जगत में 1980 और 1990 के दशक के स्वर्णिम युग का एक विश्वसनीय चेहरा और आवाज अब हमारे बीच नहीं रहीं. उनके निधन से एक युग का अंत हो गया है. वह युग जब दूरदर्शन देश का एकमात्र प्रमुख समाचार माध्यम था और समाचार पढ़ना एक संस्कार माना जाता था.
दूरदर्शन ने सोशल मीडिया पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह एक सम्मानित और प्रतिष्ठित समाचार वाचिका थीं. उनकी सौम्य आवाज, संयम, सटीक उच्चारण और गरिमापूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई. 1976 से 2005 तक दूरदर्शन से जुड़ी सरला ने लाखों-करोड़ों दर्शकों को हर शाम समाचार दिए. उनकी सादगी भरी साड़ी, सीधा पल्लू, चेहरे पर झलकती सज्जनता और आंखों में छिपी गहराई ने उन्हें हर दिल में बसाया.
टीवी समाचार के शुरुआती दौर की मजबूत नींव थीं सरला
उनका योगदान दूरदर्शन के शुरुआती वर्षों में खास रहा, जब टीवी समाचार अभी अपने प्रारंभिक दौर में थे. उनकी आवाज ने जनता का भरोसा जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. मई 1991 में राजीव गांधी की असामयिक मृत्यु की खबर उन्होंने ही पूरे राष्ट्र को दी थी. उन दुखद पलों में भी उनकी आवाज में वही शांति, संयम और गरिमा थी, जो उन्हें अलग पहचान देती थी. सरला ने हमें सिर्फ समाचार नहीं दिए, बल्कि सादगी, धैर्य, शालीनता और सच्चाई का पाठ पढ़ाया.
रात 8 बजे का बुलेटिन उस दौर में सबसे महत्वपूर्ण होता था और सरला हफ्ते में कई दिन इसे पढ़ती थीं. समाचार बिना किसी निजी राय या अतिरंजना के ठीक वैसे ही परोसे जाते थे जैसे होते थे. उच्चारण और प्रस्तुति की शुद्धता में वे बेजोड़ थीं.
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-भारत एक्सप्रेस
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