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चुनावी रण में कुत्तों की एंट्री! डूंगरपुर में बागी प्रत्याशी के दफ्तर के बाहर छोड़े गए लावारिस कुत्ते, सियासत गरमाई

Dungarpur Municipal Election: डूंगरपुर नगर परिषद चुनाव के बीच वार्ड-31 में लावारिस कुत्ते छोड़ने को लेकर विवाद खड़ा हो गया. न्यू कॉलोनी स्थित भाजपा के बागी निर्दलीय प्रत्याशी सुनील जैन के चुनावी कार्यालय के सामने नगर परिषद के शेल्टर होम की गाड़ी से कथित तौर पर 10 से 15 कुत्ते छोड़ दिए गए.

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डूंगरपुर में बागी प्रत्याशी के दफ्तर के बाहर छोड़े गए लावारिस कुत्ते (इमेज-Bharat Express)

Dungarpur Municipal Election: डूंगरपुर में नगर परिषद चुनाव के बीच वार्ड-31 में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है. यहां भाजपा के बागी और निर्दलीय प्रत्याशी सुनील जैन के चुनावी कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में लावारिस कुत्ते छोड़े जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. घटना के बाद इलाके में चर्चा का दौर शुरू हो गया और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए.

जानकारी के मुताबिक न्यू कॉलोनी स्थित सुनील जैन के चुनावी कार्यालय के सामने नगर परिषद के शेल्टर होम की एक गाड़ी पहुंची. आरोप है कि गाड़ी से करीब 10 से 15 लावारिस कुत्तों को उतारकर वहीं छोड़ दिया गया. यह सब उस समय हुआ जब कार्यालय पर कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद थे.

सुनील जैन ने लगाये गंभीर आरोप

कुत्तों को छोड़े जाते देख लोगों ने इसका विरोध किया और गाड़ी चालक से सवाल भी किए. हालांकि, विरोध के बावजूद चालक मौके से रवाना हो गया. घटना के बाद वहां मौजूद लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली.

निर्दलीय प्रत्याशी सुनील जैन ने इस पूरे मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि यह केवल एक सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश है. उन्होंने इसे सत्ता के दुरुपयोग से जोड़ते हुए निष्पक्ष चुनाव पर भी सवाल उठाए हैं.

भाजपा के लिए बढ़ी मुसीबत

वार्ड-31 का मुकाबला पहले से ही दिलचस्प माना जा रहा है. भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी और निवर्तमान उपसभापति सुदर्शन जैन मैदान में हैं, जबकि टिकट नहीं मिलने के बाद सुनील जैन निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं कांग्रेस की ओर से कनकमल जैन भी चुनावी मुकाबले में हैं.

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9 सितंबर को मतदान होना है. ऐसे में कुत्तों को छोड़ने की इस घटना ने चुनावी चर्चा को नया मुद्दा दे दिया है. अब यह मामला केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनावी बहस का हिस्सा बन गया है.

-भारत एक्सप्रेस



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