सोमवार को अम के नागांव जिले में 4.3 तेजी का भूकंप (Earthquake) आया. ये भूकंप तेजपुर से करीब 40 किमी दूर और 35 किमी की गहराई पर दर्ज किया गया. बताया जा रहा है कि भूकंप दोपहर को 12 बजकर 9 मिनट पर महसूस किया गया. वहीं इससे पहले 17 अगस्त रविवार को राजस्थान के चुरू में भी 3.1 तीव्रता वाला भूकंप दर्ज किया गया था.
हाल ही में तुर्की में आया था भूकंप
तुर्की के उत्तर-पश्चिमी प्रांत बालिकेसिर में को 6.1 तीव्रता का भूकंप (Earthquake) (Earthquake) आया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई. आपदा और आपातकालीन प्रबंधन प्राधिकरण (एएफएडी) के अनुसार, यह भूकंप 11 अगस्त को शाम 7 बजकर 53 मिनट पर सिंदिरगी जिले में आया था.
Earthquake से कई इमारतें ढहीं
गृह मंत्री अली येरलिकाया ने बताया कि 81 साल के एक बुजुर्ग को बचाने के बाद उनकी मौत हो गई थी. कई लोग घायल हुए और 15 से ज्यादा इमारतें गिर गईं थी. एनटीवी प्रसारक पर दिखाए गए फुटेज में मलबे में तब्दील एक इमारत दिखाई दे रही थी, जिसके मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही थी.
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, मंत्री येरलिकाया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया था कि यह झटका इस्तांबुल और आसपास के इलाकों में भी महसूस हुआ था. इसके बाद एएफएडी और सभी संबंधित एजेंसियों ने तुरंत मौके पर जाकर जांच शुरू कर दी थी.
रूस में भी आया था तेज भूकंप
इससे पहले, 3 अगस्त को भी प्रशांत महासागर में रविवार को रूस के कामचटका प्रायद्वीप पर 6.8 तीव्रता का झटका (Earthquake) महसूस किया गया था. यह भूकंप स्थानीय समयानुसार शाम 5 बजकर 37 मिनट पर आया था. यह क्षेत्रीय राजधानी पेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की से 277 किलोमीटर दूर, 26 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था.
जर्मन भूविज्ञान अनुसंधान केंद्र (जीएफजेड) के अनुसार, इससे पहले रूस के कुरील द्वीप समूह में 7 की तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया था. प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने भूकंप (Earthquake) की तीव्रता 7.0 मापी और पुष्टि की है कि भूकंप के बाद कोई सुनामी चेतावनी जारी नहीं की गई थी. यह भूकंप कुरील द्वीप समूह के पूर्व में शुक्रवार देर रात दर्ज किए गए 6.2 तीव्रता के एक और भूकंप के बाद आया था.
क्यों आते हैं भूकंप?
आखिर भूकंप क्यों आते हैं? इसको समझने के लिए सबसे पहले पृथ्वी की संरचना को जानना जरूरी है. हमारी पृथ्वी टैक्टोनिक प्लेट्स पर स्थित है. इन प्लेटों के नीचे तरल पदार्थ लावा है. जिसपर टैक्टोनिक प्लेट्स तैरती रहती हैं. कई बार ऐसा होता है कि ये प्लेटें आपस में टकरा जाती हैं. बार-बार टकराने से इन प्लेट्स के कोने सिकुड़ जाते हैं या फिर टूटने लगते हैं. जिससे नीचे से निकली ऊर्जा बाहर निकलने के लिए रास्ते खोजती है. जिसमें डिस्टर्बेंस होता है और इसी के बाद भूकंप की स्थिति पैदा होती है.
भूकंप के समय क्या करें?
खुले मैदान में चले जाएं और इमारतों से दूर रहें.
टेबल या मजबूत फर्नीचर के नीचे छिपें और सिर को किसी तकिये या हाथ से ढक लें.
लिफ्ट का इस्तेमाल न करें, सीढ़ियों का सहारा लें.
बिजली के तारों, पेड़ों और ऊंची इमारतों से दूर रहें.
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-भारत एक्सप्रेस
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