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काली कमाई से खरीदे आलीशान बंगले: भारत-म्यांमार बॉर्डर पर ₹1500 करोड़ के सुपारी सिंडिकेट पर ED का बड़ा एक्शन, 4 राज्यों के 20 ठिकानों पर रेड

ED INVESTIGATION: भारत-म्यांमार बॉर्डर से विदेशी सुपारी की तस्करी करने वाले ₹1500 करोड़ के सिंडिकेट का ED ने भंडाफोड़ किया. 4 राज्यों के 20 ठिकानों पर छापेमारी की गई.

ED raids
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

गुवाहाटी/नई दिल्ली, 7 जुलाई 2026: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय एक बहुत बड़े और संगठित आपराधिक सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. यह सिंडिकेट विदेशी मूल की सुपारी (Areca Nut) की अवैध तस्करी और उससे होने वाली काली कमाई को सफेद करने (Money Laundering) के धंधे में लिप्त था. इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ED की गुवाहाटी जोनल यूनिट ने असम, मिजोरम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में फैले कुल 20 ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की है. वित्तीय जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने ₹1,500 करोड़ से अधिक की ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ (काली कमाई) जेनरेट की है.

जहां नहीं उगती एक भी सुपारी, वहां दिखाया करोड़ों का व्यापार

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट और ED द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह सिंडिकेट म्यांमार से विदेशी सुपारी को मिजोरम के चम्फाई-जोखावथार (Champhai–Zokhawthar) रास्ते से भारत में अवैध रूप से लाता था. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कागजों में इस सुपारी को मिजोरम के चम्फाई जिले की घरेलू पैदावार दिखाया जाता था.

जब ED ने केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों से चम्फाई जिले में सुपारी उत्पादन का आधिकारिक डेटा निकाला, तो पता चला कि उन वर्षों में वहां डोमेस्टिक प्रोडक्शन ‘शून्य’ (Nil) था. यानी इस सिंडिकेट का जालसाजी का तरीका बेहद शातिराना था. अपनी इस अवैध तस्करी को कानूनी रूप देने के लिए ये लोग फर्जी जीएसटी (GST) इनवॉइस, बोगस कंपनियां और परिवहन के झूठे दस्तावेज तैयार करते थे.

हवाला और मिजोरम रूरल बैंक के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का खेल

ED की जांच के अनुसार, इस पूरे खेल का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था. मिजोरम के चम्फाई की सप्लायर ह्मिंगथानजमी (मेसर्स बेकी कुहवा डावर की प्रोपराइटर), लालरिनछानी और लालेनकावली म्यांमार सीमा से तस्करी को अंजाम देती थीं. असम का अबूब अहमद मजुमदार इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार था, जबकि प्रदीप कुमार पाल इसे लॉजिस्टिक सपोर्ट देता था.

इसके खरीदार और फाइनेंसर पश्चिम बंगाल के फालाकाटा और नवद्वीप, तथा उत्तर प्रदेश के वाराणसी (मेसर्स शुभ ट्रेडिंग कंपनी और मेसर्स काइमेरा इंफ्रास्ट्रक्चर) में बैठे थे. ये खरीदार असम के सिलचर में बैठे हवाला ऑपरेटरों को भुगतान करते थे. यह पैसा मिजोरम रूरल बैंक के ट्रांजिट खातों के जरिए लेयरिंग कर असली जमाकर्ताओं की पहचान छिपाते हुए चम्फाई के तस्करों तक पहुंचता था. अंत में, इन खातों से भारी कैश निकालकर हवाला के जरिए म्यांमार के सप्लायरों को भेज दिया जाता था.

₹1.30 करोड़ कैश जब्त, पॉश इलाकों में बने आलीशान विला

इस छापेमारी के दौरान ED ने ₹1.30 करोड़ का बिना हिसाब-किताब वाला कैश, सुपारी व्यापार से जुड़ी डायरियां, मोबाइल, लैपटॉप और हार्ड ड्राइव जब्त किए हैं. इसके अलावा, तस्करों से जुड़े 33 बैंक खातों को पूरी तरह से फ्रीज कर दिया गया है.

जांच में यह भी पता चला है कि इस काली कमाई का इस्तेमाल रियल एस्टेट में बड़े पैमाने पर किया गया. तस्करों और उनके मददगारों ने चम्फाई, सिलचर, गुवाहाटी, नवद्वीप, फालाकाटा, कोलकाता और वाराणसी के पॉश इलाकों में आलीशान स्वतंत्र विला (Independent Villas) और गगनचुंबी इमारतें खड़ी कर रखी थीं, जिनसे जुड़े प्रॉपर्टी के दस्तावेज भी ED ने जब्त कर लिए हैं. केंद्रीय एजेंसी इस सिंडिकेट के अन्य मददगारों का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है.



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