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ईडी ने अनिल अंबानी को पूछताछ के लिए जारी किया समन, 17 हजार करोड़ के लोन धोखाधड़ी से जुड़ा है मामला

प्रवर्तन निदेशालय ने कथित 17 हजार करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में उद्योगपति अनिल अंबानी को पूछताछ के लिए समन जारी किया है.

Anil Ambani

अनिल अंबानी.

प्रवर्तन निदेशालय ने कथित 17 हजार करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में उद्योगपति अनिल अंबानी (Anil Ambani) को पूछताछ के लिए समन जारी किया है. ईडी ने उन्हें 5 इगसित को नई दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय के मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा है.

ईडी ने 24 जुलाई को अनिल अंबानी (Anil Ambani) ग्रुप और उनसे जुड़े 35 ठिकानों पर छापेमारी की थी. यह कार्रवाई सीबीआई की दो FIR दर्ज होने के बाद शुरू हुई है. ईडी को इस मामले में नेशनल हाउसिंग बैंक, SEBI, NFRA (नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी) और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसी बड़ी संस्थाओं से भी अहम जानकारी मिली है.

Anil Ambani ग्रुप पर आरोप

ईडी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत बैंकों, निवेशकों, शेयरहोल्डर्स और आम जनता के पैसे की हेराफेरी की गई. इसमें यस बैंक के प्रमोटर समेत कई बैंक अधिकारियों को घूस देने का भी शक है.

यह भी पढ़ें- Anil Ambani से जुड़ी 50 कंपनियों पर ED की रेड, 25 चेहरों से पूछताछ; ‘टीम अनिल अंबानी’ में आखिर कौन-कौन हैं शामिल? क्या-कुछ मिला?

जांच में पता चला है कि साल 2017 से 2019 के बीच यस बैंक से करीब 3000 करोड़ रुपये के लोन गलत तरीके अनिल अंबानी (Anil Ambani) ग्रुप को दिए और दूसरी कंपनियों में घुमा दिए गए. खास बात ये है कि लोन पास होने से ठीक पहले, यस बैंक के प्रमोटर से जुड़ी कंपनियों को बड़ी रकम भेजी गई थी. ईडी अब इस पूरे लेनदेन को “लोन के बदले रिश्वत” के एंगल से भी जांच रही है. ईडी ने पाया है कि यस बैंक ने लोन पास करते वक्त अपने ही नियमों का उल्लंघन किया, जिसमें-

लोन से जुड़े दस्तावेज (CAMs) पीछे की तारीख में बनाए गए,
बिना किसी जांच-पड़ताल के कंपनियों में पैसा निवेश किया गया,
जिन कंपनियों को लोन दिया गया, उनकी आर्थिक हालत कमजोर थी,
सभी कंपनियों का पता और डायरेक्टर एक जैसे थे,
लोन पास करने और पैसे भेजने की तारीख एक ही थी,
कई लोन मंजूरी से पहले ही भेज दिए गए थे.

SEBI ने RHFL (Reliance Home Finance Ltd) से जुड़ी रिपोर्ट भी ईडी को सौंपी है. इसमें देखा गया कि RHFL ने कॉर्पोरेट लोन को एक साल में 3,742 करोड़ से बढ़ाकर 8,670 करोड़ रुपये कर दिया, जो काफी संदेहास्पद है. इसमें कई नियमों की अनदेखी और प्रक्रिया में गड़बड़ी पाई गई. ईडी ने इस मामले में आज देशभर के 35 ठिकानों पर छापेमारी की है, जिसमें 50 कंपनियों और 25 से ज्यादा लोगों के नाम सामने आए हैं. ये कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग कानून की धारा 17 के तहत की गई है.

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-भारत एक्सप्रेस



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