प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भोपाल के मीनल रेजिडेंसी में स्थित दो स्वतंत्र मकानों पर भौतिक कब्जा ले लिया है. ये संपत्तियां करोड़ों रुपये की बाजार कीमत वाली हैं और यह कदम हरिशंकर गुर्जर एवं अन्य के खिलाफ चल रहे आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) मामले के तहत उठाया गया है.
ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत इन संपत्तियों को पहले ही जब्त कर लिया था, लेकिन अब एजेंसी ने इन पर भौतिक रूप से नियंत्रण स्थापित कर लिया है. इन संपत्तियों के जब्तीकरण की कार्रवाई हरिशंकर गुर्जर और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है.
हरिशंकर गुर्जर पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अवैध तरीकों से बड़ी संपत्ति अर्जित की. उन पर आय से अधिक संपत्ति (DA) मामले में भ्रष्टाचार और काले धन को वैध बनाने के आरोप लगे हैं. जांच एजेंसियों ने पाया कि उनके पास उनके ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति थी, जिसे उन्होंने अपने और अपने करीबी सहयोगियों के नाम पर अर्जित किया.
इससे पहले, ईडी ने इस मामले में कई संपत्तियों की पहचान कर उन्हें अस्थायी रूप से जब्त किया था. अब, भोपाल के पॉश इलाके मीनल रेजिडेंसी में स्थित दो मकानों पर भौतिक कब्जा लेने के बाद, इस मामले में ईडी की जांच और मजबूत हो गई है.
ईडी की लगातार कार्रवाई
ईडी पिछले कुछ वर्षों से भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सख्त कार्रवाई कर रही है. सरकारी अधिकारियों, नेताओं, और व्यापारियों द्वारा काले धन को सफेद करने के मामलों में ईडी की जांच तेज हो गई है. हरिशंकर गुर्जर का यह मामला भी इसी श्रेणी में आता है, जहां उन्होंने कथित रूप से अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अवैध संपत्तियां अर्जित कीं. अब जब ईडी ने उनकी संपत्तियों पर भौतिक कब्जा कर लिया है, तो इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और तेज हो सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई भविष्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश देगी. इस मामले में आगे ईडी चार्जशीट दाखिल कर सकती है और संबंधित संपत्तियों की नीलामी भी हो सकती है. इस कार्रवाई से साफ है कि प्रवर्तन निदेशालय भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज कर रहा है. अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं और हरिशंकर गुर्जर व अन्य आरोपियों पर कानून का शिकंजा कैसे कसता है.
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