उड़ान में नया खतरा
हवाई यात्रा को आज दुनिया के सबसे सुरक्षित सफर के तरीकों में गिना जाता है. तकनीक में सुधार और सख्त सुरक्षा नियमों की वजह से विमान हादसों में काफी कमी आई है. लेकिन अब एविएशन सेक्टर एक ऐसे खतरे पर गंभीरता से विचार कर रहा है, जो विमान के अंदर ही मौजूद हो सकता है. चिंता इस बात की है कि अगर कोई पायलट जानबूझकर विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे तो यात्रियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए. हाल ही में सामने आई फ्लाईदुबई घटना ने इस बहस को फिर से तेज कर दिया है.
चौंकाने वाले आंकड़े क्या बताते हैं?
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के अनुसार, वर्ष 2005 से 2025 के बीच दुनियाभर में कमर्शियल एविएशन से जुड़े 270 घातक हादसे दर्ज किए गए. इन दुर्घटनाओं में विमान में सवार 8,470 लोगों की जान गई. वहीं जब अन्य प्रभावित लोगों की मौतों को भी शामिल किया जाता है, तो यह संख्या 8,778 तक पहुंच जाती है.
दूसरी ओर, वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि इसी अवधि में कम से कम 800 लोगों की मौत उन हादसों में हुई, जिनके पीछे अमेरिकी अधिकारियों ने पायलट की जानबूझकर की गई कार्रवाई की आशंका जताई या फिर ऐसी भूमिका की पुष्टि की.
कई बड़े मामलों पर अब भी बना हुआ है सवाल
हालांकि हर विमान हादसे को लेकर अलग-अलग देशों की जांच एजेंसियों की राय एक जैसी नहीं रही है. कई बार अमेरिकी अधिकारियों के निष्कर्ष और स्थानीय जांच रिपोर्टों में अंतर देखने को मिला है. कुछ चर्चित मामलों की अंतिम जांच भी अब तक पूरी नहीं हुई है.
इन मामलों में वर्ष 2014 में लापता हुआ मलेशिया एयरलाइंस MH370, 2022 का चाइना ईस्टर्न विमान हादसा और 2025 का एयर इंडिया दुर्घटना मामला शामिल हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने इन घटनाओं में जानबूझकर किए गए कदम की संभावना की ओर इशारा किया है, लेकिन संबंधित देशों की जांच एजेंसियों ने अभी तक ऐसा कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है.
जर्मनविंग्स हादसा बना बड़ा उदाहरण
साल 2015 में हुआ जर्मनविंग्स विमान हादसा उन घटनाओं में शामिल है, जिन्हें आधिकारिक रूप से जानबूझकर की गई दुर्घटना माना गया. जांच में सामने आया था कि को-पायलट ने विमान को फ्रेंच आल्प्स की पहाड़ियों से टकरा दिया था. इस दर्दनाक हादसे में कुल 150 लोगों की मौत हो गई थी.
बढ़ी उड़ानें, घटी दुर्घटनाएं
आंकड़े बताते हैं कि पिछले 20 वर्षों में दुनियाभर में हवाई यात्राओं की संख्या लगभग 37 प्रतिशत बढ़ी है. इसके बावजूद 2005 से 2025 के दौरान कमर्शियल एविएशन में मौतों का आंकड़ा करीब 35 प्रतिशत कम हुआ है. इसका मतलब है कि सामान्य तकनीकी या परिचालन कारणों से होने वाले हादसे घटे हैं, लेकिन जानबूझकर किए गए हादसों का मुद्दा अब ज्यादा गंभीर नजर आने लगा है.
अब सुरक्षा का फोकस सिर्फ मशीन नहीं
इसी वजह से एयरलाइंस कंपनियां, नियामक संस्थाएं और विमान निर्माता अब केवल तकनीकी खराबियों या मानवीय भूलों तक सीमित नहीं हैं. पायलटों की मानसिक स्थिति, उनकी गहन स्क्रीनिंग, कॉकपिट सुरक्षा और ऐसी आधुनिक तकनीकों पर भी जोर दिया जा रहा है, जो जरूरत पड़ने पर किसी गलत इरादे से की जा रही कार्रवाई को रोक सकें. फ्लाईदुबई की हालिया घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर कॉकपिट में बैठा व्यक्ति ही खतरा बन जाए, तो यात्रियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए.
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-भारत एक्सप्रेस
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