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‘चार राज्य, 70 लोगों की टीम और…’,जानें कैसे अर्चना तिवारी ने अपनी चालबाजी से 12 दिनों तक लोगों को किया गुमराह

12 दिन बाद लापता अर्चना तिवारी (Archana Tiwari) मिल गई है और पुलिस ने अर्चना को उसके परिवार को सौंप दिया है.

अर्चना तिवारी (Archana Tiwari) जो पेशे से वकील है और इंदौर में रहकर सिविल जज बनने की तैयारी कर रही थी अचानक भोपाल स्टेशन से रहस्यमय तरीके से गायब हो गईं. 7 अगस्त को वह रक्षाबंधन की छुट्टियों में नर्मदा एक्सप्रेस से अपने घर कटनी जा रही थीं. ट्रेन जैसे ही भोपाल पहुंची अर्चना गायब हो गई. उनका बैग सीट पर मिला लेकिन अर्चना (Archana Tiwari) का कोई सुराग नहीं लगा. परिवार वालों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और फिर जांच शुरू हुई.

12 दिनों तक सर्च ऑपरेशन

पुलिस ने सैकड़ों सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले, नर्मदा में सर्च ऑपरेशन चलाया और शहरों में तलाशी ली. 12 दिनों बाद पता चला कि अर्चना नेपाल की सीमा पर है. वहां से पुलिस ने अर्चना को भोपाल लेकर आई और पूछताछ की.

पूछताछ नें अर्चना ने क्या बताया ?

पुलिस की पूछताछ में अर्चना बताया कि वह मानसिक रूप से परेशान थीं क्योंकि उसके परिवार वाले उसकी मर्जी के खिलाफ शादी का दबाव बना रहे थे. उनका रिश्ता एक पटवारी लड़के से तय हो गई थी. वह शादी नहीं करना चाहती थी. इसी तनाव के चलते उसने गायब होने की योजना बनाई.

इंदौर टू नेपाल

गायब होने के बाद अर्चना ने कई शहरों का सफर किया. पहले वह नर्मदापुरम के जंगलों में गई फिर अपने दोस्त तेजेंद्र सिंह (Tejendra Singh) से मदद ली. तेजेंद्र ने उन्हें इटारसी पहुंचाया जहां से वह सारांश नाम के दोस्त के साथ शुजालपुर, इंदौर और फिर हैदराबाद गई. हैदराबाद में जब उसे समाचार में अपने केस की खबरें दिखीं तो उसने खुद को असुरक्षित महसूस किया और दिल्ली होते हुए नेपाल चली गई. नेपाल में वह काठमांडू गई और एक होटल में रुकी. पूछताछ में अर्चना ने साफ किया कि तेजेंद्र और सारांश ने सिर्फ दोस्ती में मदद की इसके अलावा उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है. पूछताछ के बाद पुलिस ने अर्चना को उसके परिवार को सौंप दिया.

पुलिस ने कैसे किया पर्दाफाश?

इस केस पर 70 सदस्यीय पुलिस टीम लगातार काम कर रही थी. उन्होंने 500 से ज्यादा फुटेज भी खंगाले. इस केस में पुलिस की गिरफ्त में सबसे पहले तेजेंद्र आया था. पूछताछ में तेजेंद्र ने कई राज खोले. एक-एक करके इस मामले की कड़ियां जुड़ती गईं और धीरे-धीरे मामला साफ होता गया. पुलिस को सारांश के मोबाइल लोकेशन से एक और सुराग मिला. मोबाइल लोकेशन से इतना तो साफ हो गया था कि यह अपहरण का मामला नहीं है. जांच में पता चला कि अर्चना और सारांश 14 अगस्त को ही नेपाल पहुंच गए थे.

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इस पूरे मामले से साफ है कि अर्चना कानून की अच्छी समझ रखती हैं और काफी चालाकी से सब कुछ प्लान किया था. लेकिन अंत में उसकी मिस्ट्री स्टोरी ज्यादा दिन टिक नहीं पाई. उसने कहा कि अब वह तब तक घर नहीं लौटेंगी जब तक सिविल जज नहीं बन जातीं और शादी भी तभी करेंगी जब वह खुद चाहेंगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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