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FSSAI का बड़ा फैसला, 6 महीने तक के बेबी फूड में सुक्रोज और फ्रुक्टोज पर लगेगी रोक

FSSAI ने 6 महीने तक के शिशुओं के बेबी फूड में सुक्रोज और फ्रुक्टोज मिलाने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया है. खाद्य नियामक ने नियमों में बदलाव के लिए जनता से 60 दिनों में सुझाव मांगे हैं.

FSSAI Proposes Ban On Sucrose Fructose In Baby Food Draft Regulations

AI IMAGE

देश में नवजात और छोटे शिशुओं की सेहत सुरक्षा को लेकर खाद्य नियामक FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) ने एक बेहद कड़ा और बड़ा कदम उठाया है. FSSAI ने 6 महीने तक के शिशुओं के लिए तैयार किए जाने वाले कमर्शियल बेबी फूड में अतिरिक्त चीनी जैसे सुक्रोज (Sucrose) और फ्रुक्टोज (Fructose) मिलाने पर पूरी तरह पाबंदी लगाने का प्रस्ताव रखा है. शुक्रवार को जारी ‘फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) संशोधन रेगुलेशन, 2026’ के ड्राफ्ट का मुख्य मकसद जीवन के शुरुआती महीनों में ही बच्चों को गैर-जरूरी चीनी के सेवन से बचाना है.

मौजूदा नियमों में क्या बदलाव प्रस्तावित है?

फिलहाल लागू नियमों के तहत बेबी फूड में मुख्य कार्बोहाइड्रेट सोर्स के रूप में लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर की सलाह दी जाती है. हालांकि, तय सीमाओं का पालन करने की शर्त पर कंपनियों को जरूरत पड़ने पर सुक्रोज या फ्रुक्टोज मिलाने की छूट थी. अब नए ड्राफ्ट में इस छूट को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव दिया गया है. यदि यह नियम लागू हो जाता है, तो निर्माता कंपनियां 6 महीने तक के शिशुओं के लिए बनने वाले फूड प्रोडक्ट्स में किसी भी रूप में सुक्रोज या फ्रुक्टोज का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी.

FSSAI ने क्यों उठाया यह सख्त कदम?

खाद्य नियामक का स्पष्ट मानना है कि शुरुआती 6 महीने बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद नाजुक होते हैं. FSSAI के मुताबिक:

  • मोटापे और डायबिटीज से बचाव: कम उम्र में अतिरिक्त चीनी मिलने से बच्चों में बचपन का मोटापा (Childhood Obesity), दांतों का खराब होना और भविष्य में मेटाबॉलिक समस्याएं बढ़ने का खतरा रहता है.
  • स्तनपान के दिशा-निर्देशों से मेल: यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी उन दिशा-निर्देशों के बिल्कुल अनुकूल है, जो जन्म के शुरुआती 6 महीनों तक केवल मां के दूध (Exclusive Breastfeeding) को ही प्राथमिकता देते हैं.

जनता और कंपनियों से मांगे गए 60 दिनों में सुझाव

FSSAI ने इस ड्राफ्ट को सार्वजनिक करते हुए सभी स्टेकहोल्डर्स, विशेषज्ञों और आम जनता को राय व आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 60 दिनों का समय दिया है. तय समयसीमा में मिलने वाले सुझावों की समीक्षा करने के बाद ही इस संशोधन को अंतिम रूप देकर देशभर में लागू किया जाएगा. रेगुलेटर के इस वैज्ञानिक कदम से बेबी फूड मैन्युफैक्चरिंग में पारदर्शिता और पोषण संबंधी गुणवत्ता में सुधार आना तय माना जा रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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