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गिरिडीह में उपचुनाव की आहट, मंत्री सुदिव्य सोनू के निधन से खाली हुई सीट पर सियासत तेज, JMM में परिवारवाद की परंपरा जारी रहेगी?

Giridih By-election 2026: झारखंड की गिरिडीह विधानसभा सीट पर सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद उपचुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं.

By-election in Giridih

गिरिडीह में उपचुनाव की आहट

Giridih By-Election 2026: झारखंड की गिरिडीह विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे बढ़ रही हैं. जिले के निर्वाचन पदाधिकारी ने चुनाव आयोग को सीट खाली होने की औपचारिक जानकारी दे दी है. यह सीट राज्य सरकार में मंत्री रहे और गिरिडीह से विधायक चुने गए सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद खाली हुई है. अब इस उपचुनाव में कौन उम्मीदवार होगा और किस दल की क्या रणनीति रहेगी, इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

परिवार से उम्मीदवार उतारने की चर्चा

सुदिव्य कुमार सोनू ने 2019 और 2024 में गिरिडीह विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी. 2024 में उन्हें मंत्री पद भी मिला था. उनके निधन के बाद उपचुनाव होना तय है. नियमों के अनुसार रिक्त सीट पर निर्धारित समय में चुनाव कराना जरूरी है. हालांकि तारीख और उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है. लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि JMM उनके परिवार से किसी सदस्य को उम्मीदवार बना सकती है. खासकर उनकी पत्नी श्वेता शर्मा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पिछले फैसलों को देखते हुए यह संभावना मजबूत मानी जा रही है. जैसे मधुपुर में हाजी हुसैन अंसारी और डुमरी में जगन्नाथ महतो के निधन के बाद उनके परिवार से ही प्रत्याशी उतारे गए थे.

बीजेपी और अन्य दलों की रणनीति

गिरिडीह उपचुनाव में JMM के साथ-साथ बीजेपी और अन्य दलों की रणनीति पर भी सबकी नजरें हैं. 2024 के चुनाव में सुदिव्य सोनू ने बीजेपी उम्मीदवार निर्भय कुमार शाहाबादी को हराया था. ऐसे में उपचुनाव केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के लिए संगठन और जनाधार परखने का बड़ा मौका है. JMM के लिए सकारात्मक पक्ष यह है कि सोनू संगठन में सक्रिय थे और मुख्यमंत्री व उनकी पत्नी कल्पना सोरेन के करीबी थे. उनके असमय निधन से जनता की सहानुभूति उनकी पत्नी श्वेता शर्मा के साथ जा सकती है.

मतदाता सूची पुनरीक्षण पर भी नजर

गिरिडीह जिले में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण भी चल रहा है. जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि अंतिम प्रकाशन की तारीख 19 अक्टूबर 2026 तय की गई है. दावा-आपत्ति की अंतिम तिथि 30 सितंबर तक बढ़ाई गई है. इसका असर उपचुनाव की तैयारियों पर भी पड़ेगा.

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वोटरों को इंतजार दलों के फैसले का

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि JMM, बीजेपी और अन्य दल किस चेहरे को मैदान में उतारते हैं. उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद चुनावी तस्वीर साफ होगी. इसके बाद चुनाव आयोग नामांकन, मतदान और मतगणना की तारीखें घोषित करेगा. यह उपचुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि यह सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद खाली हुई सीट पर हो रहा है. आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की गतिविधियां और तेज होंगी और जनता की नजरें अब चुनावी घोषणा और प्रत्याशियों के नाम पर टिकी हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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