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ग्रेटर नोएडा में नकाबपोश ने पिता बनकर किया फोन, पर 5वीं की छात्रा की सतर्कता ने टाल दिया बड़ा कांड

Greater Noida News: मीडिया प्रोफेशनल मनोहर सिंह की बेटी वर्तिका ने अपनी बहादुरी और सूझबूझ से कथित अपहरण की कोशिश को विफल कर दिया. एनपीएस स्कूल में कक्षा 5 में पढ़ने वाली वर्तिका स्कूल से घर लौट रही थी, तभी एक नकाबपोश शख्स उसके पास पहुंचा. उसने खुद को उसके पिता द्वारा भेजा गया व्यक्ति बताया और साथ चलने को कहा.

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Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा वेस्ट में हुई एक सनसनीखेज घटना ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. हालांकि, इस मामले में 10 साल की बच्ची की समझदारी और सतर्कता ने एक संभावित बड़े अपराध को टाल दिया.

मीडिया प्रोफेशनल मनोहर सिंह की बेटी वर्तिका ने अपनी बहादुरी और सूझबूझ से कथित अपहरण की कोशिश को विफल कर दिया. एनपीएस स्कूल में कक्षा 5 में पढ़ने वाली वर्तिका स्कूल से घर लौट रही थी, तभी एक नकाबपोश शख्स उसके पास पहुंचा. उसने खुद को उसके पिता द्वारा भेजा गया व्यक्ति बताया और साथ चलने को कहा.

वर्तिका ने भरोसा करने से किया इनकार

जब वर्तिका ने उस पर भरोसा करने से इनकार कर दिया, तो आरोपी ने उसे यकीन दिलाने के लिए एक फर्जी फोन कॉल का सहारा लिया. उसने किसी व्यक्ति से वर्तिका के पिता बनकर बात करने को कहा, लेकिन वर्तिका ने तुरंत समझ लिया कि फोन पर मौजूद आवाज उसके पिता की नहीं है, क्योंकि उसे उनका नंबर और आवाज दोनों अच्छी तरह याद थे.

खतरे का एहसास होते ही वर्तिका ने घबराने के बजाय समझदारी दिखाई और तुरंत वहां से भागकर सुरक्षित अपने घर पहुंच गई. उसकी सतर्कता ने न सिर्फ उसे सुरक्षित रखा, बल्कि एक गंभीर घटना होने से भी रोक दिया.

बच्चों के लिए बड़ी सीख

यह घटना इस बात का उदाहरण है कि बच्चों को दी गई सही सीख और जागरूकता मुश्किल परिस्थितियों में कितनी मददगार साबित हो सकती है. वर्तिका ने अनजान व्यक्ति पर भरोसा नहीं किया, स्थिति को समझा और तुरंत सही फैसला लिया.

माता-पिता के लिए बड़ा संदेश

यह मामला खासतौर पर शहरी इलाकों में रहने वाले माता-पिता के लिए चेतावनी है. बच्चों को सुरक्षा से जुड़ी जरूरी बातें सिखाना और उन्हें सतर्क बनाना बेहद जरूरी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि परिवारों को बच्चों के साथ एक सीक्रेट कोड वर्ड तय करना चाहिए, ताकि वे किसी भरोसेमंद व्यक्ति की पहचान कर सकें. बच्चों को घर का पता और जरूरी फोन नंबर याद कराना भी अहम है.

इसके अलावा, उन्हें फर्जी कॉल और झूठे बहानों से सतर्क रहने की सीख देनी चाहिए. बच्चों को यह भी समझाना जरूरी है कि किसी खतरे की स्थिति में तुरंत भीड़भाड़ वाली जगह की ओर जाएं और मदद मांगें.

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पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है. शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि इस तरह की घटनाओं के पीछे कोई गिरोह सक्रिय हो सकता है.

वर्तिका की बहादुरी और जागरूकता आज हर बच्चे और अभिभावक के लिए एक मिसाल बन गई है.

-भारत एक्सप्रेस



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